पिछले साल कृषि योजनाओं की लग गई थी झड़ी, इस बार प्राकृतिक खेती, FPO और मखाने की चर्चा तक नहीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की थी. यह योजना 2018 में शुरू हुए आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित थी और राज्यों के साथ मिलकर लागू की जाने की बात कही गई थी.
Budget 2026: इस बार के बजट में किसानों के लिए अलग से कुछ खास देखने को नहीं मिला. बजट 2025 में खेती-किसानों को लेकर कई योजनाओं का ऐलान किया गया था. लेकिन इस बार उनकी चर्चा तक नहीं गई है. खास बात यह है कि पीएम किसान योजना की राशि में बढ़ोतरी को लेकर इस बार किसानों को काफी उम्मीदें थीं. पर हर बार की तरह इस बार भी अन्नदाताओं को निराश होना पड़ा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण में पीएम किसान योजना को लेकर अपने भाषण में कोई जिक्र तक नहीं किया. वहीं, पिछले साल प्राकृतिक खेती, FPO और श्रीअन्न को लेकर सरकार की तरफ से इस बार कोई घोषणा नहीं की गई.
हालांकि, पिछले साल यानी बजट 2025 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के लिए कई घोषणाएं की थीं. बिहार में मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया गया था, जिसके लिए 476.03 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. सीतारमण ने कहा था यह बोर्ड उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग को बेहतर करेगा. इसके तहत मखाना किसानों के लिए FPO बनाए जाएंगे, उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाया जाएगा.
करीब 1 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा
साथ ही केंद्रीय बजट 2025-26 में ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ का ऐलान किया गया था. इसके लिए आवंटन 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 616.01 करोड़ रुपये किया गया था. यह मिशन नवंबर 2024 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता से मुक्त करना है. इसका लक्ष्य 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती को अपनाना है, जिससे करीब 1 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा.
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की थी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की थी. यह योजना 2018 में शुरू हुए आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित थी और राज्यों के साथ मिलकर लागू की जाने की बात कही गई थी. इसके तहत कम उत्पादकता और औसत से कम कृषि संकेतकों वाले 100 जिलों को शामिल किया गया था. योजना का मकसद खेती की उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधिकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण सुविधाएं मजबूत करना था. साथ ही सिंचाई सुधारना और किसानों को आसान कर्ज उपलब्ध कराना था. इससे करीब 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होने की उम्मीद थी.
नारियल किसानों को तोहफा
हालांकि, इस बार किसानों को लिए कुछ खास ऐलान नहीं किया गया. नए तालाब निर्माण कराने की बात कही गई है. साथ ही नारियल की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार एक नारियल संवर्धन योजना शुरू करेगी, जिसके तहत पुराने पेड़ों की जगह नई और बेहतर किस्म के पौधे लगाए जाएंगे. साथ ही काजू और कोको के लिए एक विशेष कार्यक्रम भी होगा, जिससे उत्पादन और प्रोसेसिंग मजबूत होगी, निर्यात बढ़ेगा और 2030 तक भारतीय काजू और कोको को वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया है.