मौसम और कम बुवाई से घट सकती है जीरे की पैदावार, क्या राजस्थान संभालेगा बाजार?
भारत में जीरे की खेती मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में होती है. इस बार गुजरात में जीरे की खेती का रकबा कम होने के कारण उत्पादन घटने की संभावना है. FISS के अनुमान के अनुसार गुजरात में इस साल उत्पादन लगभग 27 प्रतिशत घटकर 1.83 लाख टन रह सकता है.
Cumin production 2026: भारत में जीरे की नई फसल बाजार में आनी शुरू हो गई है, लेकिन इस साल उत्पादन को लेकर व्यापारियों और किसानों के बीच अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं. मौसम में बदलाव, कुछ इलाकों में कम बुवाई और फसल में लगने वाली बीमारियों के कारण 2026 के सीजन में जीरे की पैदावार कम रहने की आशंका जताई जा रही है.
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, मसाला कारोबार से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल उत्पादन में 5 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. हालांकि कुछ कारोबारी यह भी मान रहे हैं कि राजस्थान में बेहतर उत्पादन के कारण कुल पैदावार में हल्की बढ़ोतरी भी संभव है.
इस बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है. ईरान-इजरायल तनाव के कारण कुछ देशों में शिपमेंट प्रभावित होने से बाजार का माहौल फिलहाल थोड़ा कमजोर दिखाई दे रहा है.
उत्पादन घटने का अनुमान
मसाला व्यापार से जुड़ी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स (FISS) के अनुसार 2026 में जीरे का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत कम होकर लगभग 5.13 लाख टन रह सकता है. पिछले साल देश में जीरे का उत्पादन लगभग 5.38 लाख टन रहा था. अगर इसे 55 किलोग्राम की बोरियों में देखा जाए तो इस साल करीब 93.29 लाख बोरी उत्पादन का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 97.93 लाख बोरी था.
FISS के संस्थापक अध्यक्ष अश्विन नायक का कहना है कि इस बार फसल अच्छी है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम हो सकती है. उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध लंबा खिंचता है तो निर्यात पर असर पड़ सकता है और इसका सीधा असर कीमतों पर भी दिख सकता है.
गुजरात में उत्पादन घटने की आशंका
भारत में जीरे की खेती मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में होती है. इस बार गुजरात में जीरे की खेती का रकबा कम होने के कारण उत्पादन घटने की संभावना है. FISS के अनुमान के अनुसार गुजरात में इस साल उत्पादन लगभग 27 प्रतिशत घटकर 1.83 लाख टन रह सकता है. इसकी मुख्य वजह 18 प्रतिशत कम बुवाई और करीब 11 प्रतिशत कम उत्पादन माना जा रहा है. गुजरात के कुछ क्षेत्रों में मौसम की अनियमितता और फसल में लगने वाली ब्लाइट बीमारी ने भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
राजस्थान में बेहतर फसल की उम्मीद
दूसरी ओर, राजस्थान में इस बार जीरे की फसल अच्छी मानी जा रही है. अनुमान है कि यहां उत्पादन करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 3.29 लाख टन तक पहुंच सकता है. राजस्थान में बुवाई का क्षेत्र करीब 4 प्रतिशत बढ़ा है और बेहतर पैदावार के कारण कुल उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है.
राजस्थान स्पाइस एसोसिएशन के वित्त निदेशक दिनेश सोनी का कहना है कि राज्य में इस साल उत्पादन लगभग 80 से 82 लाख बोरी के आसपास रह सकता है. पिछले साल की करीब 20 लाख बोरी का स्टॉक भी मौजूद है, जिससे कुल आपूर्ति एक करोड़ बोरी से ज्यादा रह सकती है. उनके अनुसार देश में लगभग 60 से 65 लाख बोरी जीरे की खपत घरेलू बाजार में होती है, जबकि बाकी निर्यात के लिए जाती है.
मौसम और बीमारी का असर
जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी का कहना है कि इस साल जीरे की पैदावार कम से कम 10 प्रतिशत तक घट सकती है. उन्होंने बताया कि इस बार सर्दी का मौसम सामान्य से कम समय तक रहा, जबकि जीरे की फसल को अच्छी वृद्धि और दाने बनने के लिए पर्याप्त ठंड की जरूरत होती है. इसके अलावा कई किसानों ने अच्छी बारिश के कारण जीरे की जगह सरसों की खेती को प्राथमिकता दी, जिससे बुवाई का क्षेत्र भी कम हुआ.
बाजार में कीमतों पर दबाव
जीरे के निर्यात कारोबार से जुड़े योगेश मेहता (SpicExim) का मानना है कि इस साल उत्पादन करीब 20 प्रतिशत घटकर 4.4 लाख टन तक रह सकता है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण फिलहाल निर्यात का माहौल कमजोर है और कई शिपमेंट रुक गए हैं. उनका कहना है कि अगले 2 से 3 हफ्तों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारी धीमी रह सकती है और अप्रैल के पहले सप्ताह से मांग में सुधार की उम्मीद है. फिलहाल नई फसल की आवक शुरू होने से कच्चे जीरे के दाम ₹180 से ₹190 प्रति किलो के आसपास चल रहे हैं. स्पॉट बाजार में कीमत लगभग ₹4200 प्रति 20 किलो के आसपास बताई जा रही है.
निर्यात में भी आई गिरावट
आंकड़ों के अनुसार भारत से जीरे का निर्यात भी हाल के महीनों में थोड़ा कमजोर रहा है. अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान भारत ने लगभग 1.56 लाख टन जीरा निर्यात किया, जो पिछले साल की समान अवधि के 1.78 लाख टन से करीब 12 प्रतिशत कम है. निर्यात का कुल मूल्य भी घटकर 418 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 585 मिलियन डॉलर था.
आगे कैसा रहेगा बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य हो जाते हैं और निर्यात फिर से बढ़ता है तो जीरे के दाम स्थिर रह सकते हैं. लेकिन यदि मौसम की समस्या और वैश्विक तनाव जारी रहता है तो बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है. फिलहाल किसान और व्यापारी दोनों नई फसल के आने और बाजार की मांग पर नजर बनाए हुए हैं.