सरसों की खेती में की ये गलती तो आधी पैदावार होगी बर्बाद! जानें कम लागत में बंपर उत्पादन का आसान फॉर्मूला

Sarson Ki Kheti: सरसों की खेती अगर सही तरीके से की जाए, तो यह फसल किसानों के लिए सोना उगलने वाली मशीन बन सकती है. लेकिन अफसोस, थोड़ी सी जानकारी की कमी और गलत तकनीक के कारण किसान मेहनत तो पूरी करते हैं लेकिन मुनाफा बस आधा ही रह जाता है. ऐसे में मिट्टी से लेकर बीज, खाद, सिंचाई और कीट नियंत्रण तक, अगर हर कदम वैज्ञानिक तरीके से उठाया जाए, तो कम लागत में बंपर पैदावार मिलना तय है. यही वजह है कि कृषि वैज्ञानिक सरसों की खेती को स्मार्ट फार्मिंग का मजबूत हथियार मानते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jan, 2026 | 07:39 PM
1 / 6सरसों की अच्छी पैदावार का पहला मंत्र है बुआई से पहले मिट्टी की जांच. इससे खेत में पोषक तत्वों की सही स्थिति पता चलती है और किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक डालकर बेवजह का खर्च बचा सकते हैं.

सरसों की अच्छी पैदावार का पहला मंत्र है बुआई से पहले मिट्टी की जांच. इससे खेत में पोषक तत्वों की सही स्थिति पता चलती है और किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक डालकर बेवजह का खर्च बचा सकते हैं.

2 / 6सरसों की फसल में सल्फर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. इससे न सिर्फ दाना ज्यादा बनता है, बल्कि तेल की मात्रा और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर हो जाती है.

सरसों की फसल में सल्फर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. इससे न सिर्फ दाना ज्यादा बनता है, बल्कि तेल की मात्रा और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर हो जाती है.

3 / 6पीएसबी और एजोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों के प्रयोग से सरसों की पैदावार करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. साथ ही मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है.

पीएसबी और एजोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों के प्रयोग से सरसों की पैदावार करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. साथ ही मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है.

4 / 6प्रति एकड़ सिर्फ 2 किलो बीज का प्रयोग करें और बुआई से पहले कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार जरूर करें. इससे फसल शुरुआती बीमारियों से सुरक्षित रहती है.

प्रति एकड़ सिर्फ 2 किलो बीज का प्रयोग करें और बुआई से पहले कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार जरूर करें. इससे फसल शुरुआती बीमारियों से सुरक्षित रहती है.

5 / 6बुआई के तुरंत बाद पेन्डीमेथालीन का छिड़काव करने से खरपतवार नहीं उगते और सरसों के पौधों को मिट्टी का पूरा पोषण मिलता है, जिससे बढ़वार तेज होती है.

बुआई के तुरंत बाद पेन्डीमेथालीन का छिड़काव करने से खरपतवार नहीं उगते और सरसों के पौधों को मिट्टी का पूरा पोषण मिलता है, जिससे बढ़वार तेज होती है.

6 / 6. GM सरसों में उच्च उपज, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और तेल की अच्छी निकासी जैसी विशेषताओं पर ध्यान दिया गया है. (Photo Credit: Canva)

. GM सरसों में उच्च उपज, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और तेल की अच्छी निकासी जैसी विशेषताओं पर ध्यान दिया गया है. (Photo Credit: Canva)

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Published: 18 Jan, 2026 | 07:39 PM

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