युद्ध का असर: चीन समेत कई देशों से बढ़ी भारतीय कॉटन यार्न की मांग, कीमतों में उछाल
सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश भी भारत से कॉटन यार्न खरीद रहे हैं. इन देशों से भी लगातार अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं. इन देशों की टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत के धागे पर निर्भर होती जा रही है, जिससे भारतीय बाजार में नई ऊर्जा आई है.
Cotton yarn exports: दुनिया में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब सीधे बाजारों पर दिखने लगा है. खासकर पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने से वैश्विक सप्लाई चेन गड़बड़ा गई है. लेकिन अब इसी का फायदा भारत को मिल रहा है. भारतीय कॉटन यार्न यानी सूती धागे की मांग अचानक बढ़ गई है, और यह मांग चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे बड़े देशों से आ रही है.
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, इस बढ़ती मांग से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को काफी राहत मिली है. पहले जहां बाजार थोड़ा सुस्त था, अब वहां तेजी देखने को मिल रही है. साथ ही कीमतों में भी उछाल आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो भारत को आने वाले समय में और बड़ा फायदा मिल सकता है.
चीन की बढ़ती जरूरत, भारत बना सहारा
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन कोटक के मुताबिक, चीन से कॉटन यार्न की मांग इस समय काफी तेज हो गई है. दरअसल, युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है, जिससे चीन ने जो कच्चा कपास खरीदा था, वह समय पर वहां नहीं पहुंच पा रहा है.
ऐसी स्थिति में चीन ने नया रास्ता अपनाया है. अब वह कच्चे कपास की जगह सीधे भारत से तैयार कॉटन यार्न खरीद रहा है, ताकि उसकी फैक्ट्रियां बंद न हों और उत्पादन चलता रहे. इससे भारतीय निर्यातकों को अच्छा मौका मिला है.
सप्लाई चेन बाधित, भारत के कॉटन यार्न की बढ़ी डिमांड से उद्योग को राहत, pc- AI
बांग्लादेश और वियतनाम भी पीछे नहीं
सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश भी भारत से कॉटन यार्न खरीद रहे हैं. इन देशों से भी लगातार अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं. इन देशों की टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत के धागे पर निर्भर होती जा रही है, जिससे भारतीय बाजार में नई ऊर्जा आई है. मांग बढ़ने का असर कीमतों पर भी साफ दिख रहा है कॉटन यार्न 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो गया है.
ढुलाई महंगी, समय भी बढ़ा
विनय कोटक बिजनेसलाइन को बताते हैं कि सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण सिर्फ कीमत ही नहीं बढ़ी, बल्कि माल पहुंचने में समय भी ज्यादा लग रहा है. पहले जहां सामान जल्दी पहुंच जाता था, अब उसमें 10 से 15 दिन की देरी हो रही है. साथ ही, फ्रेट यानी ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है. यही वजह है कि कई देशों के लिए कच्चा कपास मंगाना मुश्किल हो गया है, और वे सीधे यार्न खरीदना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं.
चीन ने बढ़ाया आयात कोटा
कपास की कमी को देखते हुए चीन ने अपने आयात नियमों में भी ढील दी है. चीन की नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने 3 लाख टन कॉटन आयात के लिए नया कोटा जारी किया है. यह कोटा पिछले साल के मुकाबले 1 लाख टन ज्यादा है, जिससे साफ है कि चीन को कपास की ज्यादा जरूरत है और वह सप्लाई सुनिश्चित करना चाहता है.
कीमतों में तेजी, बाजार में हलचल
वैश्विक स्तर पर भी कॉटन की कीमतें बढ़ रही हैं. ICE एक्सचेंज पर कॉटन फ्यूचर्स करीब 68.78 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गए हैं, जो पिछले दो हफ्तों में करीब 13 फीसदी की बढ़त दिखाते हैं.
भारत में भी इसका असर दिख रहा है. कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने सिर्फ दो दिनों में ही कीमत 1,200 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ा दी है. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
घरेलू खपत भी बढ़ी
बाजार में तेजी को देखते हुए कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने घरेलू खपत का अनुमान भी बढ़ा दिया है. अब फरवरी के अंत तक खपत 315 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) रहने की उम्मीद है. पहले यह अनुमान 305 लाख गांठ था, यानी 10 लाख गांठ की बढ़ोतरी की गई है. इससे साफ है कि देश के अंदर भी मांग मजबूत बनी हुई है.