Indian chilli prices 2026: देश में इस समय लाल मिर्च का बाजार पूरी तरह गर्म नजर आ रहा है. खास बात यह है कि दामों में तेजी उस समय बनी हुई है, जब निर्यात, खासकर चीन की मांग, काफी कमजोर हो गई है. इसके बावजूद बाजार में मजबूती बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण घरेलू मांग और कम उत्पादन बताया जा रहा है.
चीन की खरीद में भारी गिरावट
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, भारत से मिर्च खरीदने वाला सबसे बड़ा बाजार चीन इस साल लगभग शांत बना हुआ है. पिछले साल 31 मार्च तक जहां करीब 9,000 कंटेनर मिर्च चीन को भेजे गए थे, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 2,000 कंटेनर रह गया है. पिछले तीन महीनों में चीन की खरीद लगभग 400 गुना तक कम रही है. व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि चीन इस बार बाजार में मौजूद तो है, लेकिन सक्रिय रूप से खरीदारी नहीं कर रहा.
क्यों कम हुई चीन की मांग?
गुंटूर चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वेलगापुडी संबासिवा राव के मुताबिक, चीन ने पिछले साल कम कीमतों पर बड़ी मात्रा में मिर्च खरीदकर स्टॉक जमा कर लिया था. उस समय मिर्च की कीमत करीब 100-110 रुपये प्रति किलो थी. इसी वजह से इस साल उसे ज्यादा खरीदारी की जरूरत नहीं पड़ी और उसने भारतीय बाजार से दूरी बना ली.
घरेलू मांग ने संभाला पूरा बाजार
निर्यात में गिरावट के बावजूद मिर्च के दाम इसलिए टिके हुए हैं क्योंकि देश के अंदर मांग काफी मजबूत बनी हुई है. खासकर मसाला कंपनियां और उत्तर भारत के व्यापारी बड़े पैमाने पर खरीद कर रहे हैं. व्यापारियों के अनुसार, यही घरेलू खरीद बाजार को सहारा दे रही है और कीमतों को गिरने नहीं दे रही.
उत्पादन में गिरावट का बड़ा असर
इस साल मिर्च की फसल में भी कमी देखी गई है. अनुमान के अनुसार उत्पादन में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जबकि कुछ जगहों पर यह कमी 30-35 प्रतिशत तक बताई जा रही है. कम पैदावार का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. तेजा, 334 और 341 जैसी सामान्य किस्मों की कीमतें करीब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं.
ब्याडगी मिर्च में रिकॉर्ड तेजी
इस बार खासकर रंग वाली मिर्च की किस्मों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. कर्नाटक की मशहूर ब्याडगी मिर्च की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. ब्याडगी डब्बी किस्म का भाव करीब 62,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है वहीं KDL किस्म लगभग 55,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. बताया जा रहा है कि इन किस्मों के उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत की कमी आई है, जिसके कारण कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं.
फसल क्षेत्र में कमी भी वजह
मिर्च की खेती में इस बार गिरावट का एक बड़ा कारण फसल क्षेत्र का कम होना भी है. 2025-26 सीजन में कई किसानों ने मिर्च की जगह मक्का, कपास और दलहन जैसी फसलों को प्राथमिकता दी. इससे मिर्च का कुल रकबा घट गया और उत्पादन में कमी आई.
अन्य देशों से भी सीमित मांग
चीन के अलावा अमेरिका, यूरोप और थाईलैंड जैसे बाजारों से भी इस समय मांग कमजोर बनी हुई है. हालांकि बांग्लादेश, श्रीलंका और मलेशिया जैसे देश अभी भी मिर्च खरीद रहे हैं. व्यापारियों को उम्मीद है कि जून के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.