दुनिया में बढ़ी भारतीय चाय की चुस्की, 2025 में उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़ने की उम्मीद

भारतीय चाय की मांग खासतौर पर ईरान, इराक और चीन जैसे देशों में बढ़ी है. इन बाजारों में भारत की काली चाय और मजबूत स्वाद वाली चाय को पसंद किया जा रहा है. निर्यातकों का कहना है कि इन देशों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे साल के आखिरी महीनों में भी निर्यात की रफ्तार बनी रही.दुनिया में बढ़ी भारतीय चाय की चुस्की,

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 26 Dec, 2025 | 08:28 AM

Tea production: भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी और देश की पहचान का अहम हिस्सा है. असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों की हरी-भरी चाय बागानों से निकली पत्तियां देश-विदेश में भारतीय चाय की खुशबू फैलाती हैं. साल 2025 भारत की चाय इंडस्ट्री के लिए उम्मीदों से भरा हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि इस साल चाय का उत्पादन और निर्यात दोनों ही पिछले साल की तुलना में बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है.

2024 के मुकाबले 2025 में बढ़ेगा उत्पादन

आंकड़ों के मुताबिक भारत ने साल 2024 में करीब 1284 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन किया था. वहीं 2025 में अक्टूबर तक ही चाय उत्पादन 1133 मिलियन किलोग्राम के आंकड़े को पार कर चुका है. यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हल्की बढ़त को दर्शाता है. सबसे अहम बात यह है कि इस बार दिसंबर महीने में भी कई चाय बागानों में पत्तियों की तुड़ाई जारी रही, जबकि पिछले साल कई इलाकों में नवंबर के अंत तक ही तुड़ाई बंद कर दी गई थी.

दिसंबर में उत्पादन जारी रहने से कुल सालाना उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि 2025 में चाय का कुल उत्पादन 1340 मिलियन किलोग्राम के आसपास पहुंच सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत अधिक होगा. यह बढ़ोतरी भले ही बहुत बड़ी न लगे, लेकिन चाय उद्योग जैसे बड़े सेक्टर में यह एक मजबूत संकेत माना जा रहा है.

दिसंबर बना चाय उद्योग के लिए फायदेमंद महीना

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, इस साल दिसंबर का महीना चाय उद्योग के लिए खास साबित हुआ है. मौसम अनुकूल रहने के कारण कई बागानों में पत्तियों की गुणवत्ता अच्छी रही और तुड़ाई का काम जारी रखा जा सका. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा, बल्कि बागानों में काम करने वाले मजदूरों को भी अतिरिक्त दिनों तक रोजगार मिला. चाय उत्पादक राज्यों में इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

निर्यात के मोर्चे पर भी भारत मजबूत

जहां एक ओर उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भारत के चाय निर्यात से भी अच्छी खबर सामने आ रही है. वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद भारतीय चाय की मांग बनी हुई है. खासतौर पर पश्चिम एशिया और एशियाई देशों में भारत से चाय की खरीद बढ़ी है.

साल 2024 में भारत ने करीब 256 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया था. वहीं 2025 में अक्टूबर तक ही निर्यात 228 मिलियन किलोग्राम से ज्यादा पहुंच चुका है. यह आंकड़ा साफ तौर पर इशारा करता है कि पूरे साल का निर्यात पिछले साल से ज्यादा रहने वाला है. अनुमान है कि 2025 में चाय निर्यात 15 से 20 मिलियन किलोग्राम तक अधिक हो सकता है.

ईरान, इराक और चीन से बढ़ी मांग

भारतीय चाय की मांग खासतौर पर ईरान, इराक और चीन जैसे देशों में बढ़ी है. इन बाजारों में भारत की काली चाय और मजबूत स्वाद वाली चाय को पसंद किया जा रहा है. निर्यातकों का कहना है कि इन देशों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे साल के आखिरी महीनों में भी निर्यात की रफ्तार बनी रही.

किसानों और बागान मजदूरों के लिए राहत

उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा फायदा चाय बागानों से जुड़े किसानों और मजदूरों को मिलने की उम्मीद है. ज्यादा उत्पादन का मतलब अधिक काम के दिन और बेहतर आमदनी की संभावना है. वहीं निर्यात बढ़ने से चाय की कीमतों को भी सहारा मिल सकता है, जिससे पूरे सेक्टर को मजबूती मिलेगी.

2025 चाय उद्योग के लिए सकारात्मक साल

कुल मिलाकर 2025 भारत की चाय इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक साल बनता नजर आ रहा है. उत्पादन में हल्की लेकिन स्थिर बढ़ोतरी और निर्यात में मजबूत उछाल यह दिखाता है कि भारतीय चाय वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाए हुए है. अगर मौसम और बाजार की स्थिति इसी तरह अनुकूल रही, तो आने वाले समय में चाय उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में और भी मजबूत भूमिका निभा सकता है.

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