पैकेजिंग महंगी, LPG कम… डेयरी सेक्टर पर नया संकट, समझिए प्लास्टिक की कमी से क्यों बढ़ी परेशानी

Iran Israel war impact: प्लास्टिक की कीमतों में अचानक तेजी का सीधा संबंध पेट्रोलियम उत्पादों से है. प्लास्टिक कच्चे तेल से बनता है और जब कच्चे तेल या गैस की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर प्लास्टिक पर भी पड़ता है. प्लास्टिक बनने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है.

नई दिल्ली | Published: 18 Mar, 2026 | 07:07 AM

Iran Israel war impact: पश्चिम एशिया में चल रहे इजराइल-ईरान तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है. अब तक इसका असर तेल और गैस की कीमतों तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब यह संकट धीरे-धीरे डेयरी सेक्टर को भी प्रभावित करने लगा है. दूध और उससे जुड़े उत्पादों की सप्लाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तीनों पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की जेब पर भी दिख सकता है.

LPG संकट ने डेयरी की नींव को हिलाया

अक्सर लोग LPG को सिर्फ खाना बनाने के गैस सिलेंडर के रूप में देखते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि डेयरी उद्योग में इसकी भूमिका बेहद अहम है. दूध को सुरक्षित और लंबे समय तक उपयोग के लिए पाश्चराइज (pasteurization) करना जरूरी होता है. इस प्रक्रिया में दूध को लगभग 72°C तक गर्म किया जाता है, ताकि बैक्टीरिया खत्म हो जाएं.

इस पूरी प्रक्रिया के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है, जो ज्यादातर डेयरियां LPG से पूरी करती हैं. खासकर छोटे और मध्यम स्तर की डेयरियां पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं. ऐसे में जब LPG की सप्लाई प्रभावित होती है, तो दूध को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करना मुश्किल हो जाता है.

पैकेजिंग संकट: दूध है, लेकिन पैकेट नहीं

आनंदा डेयरी के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. राधेश्याम दीक्षित किसान इंडिया को बताते हैं कि, भारत में ज्यादातर दूध प्लास्टिक के पैकेट में ही बेचा जाता है. लेकिन मौजूदा हालात में पैकेजिंग सामग्री की भारी कमी सामने आ रही है. उनके पास केवल कुछ ही दिन का पैकेजिंग स्टॉक बचा है. अगर हालात नहीं सुधरे, तो दूध होने के बावजूद उसे बाजार तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा.

यही वजह है कि दूध की सप्लाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. अगर पैकेट ही नहीं होंगे, तो दूध की डिलीवरी चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है.

डेयरी कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव

डॉ. राधेश्याम दीक्षित बताते हैं कि इस संकट के कारण प्लास्टिक दाने यानी पेट्रोकेमिकल की कीमतों में तेज उछाल आया है. इसके साथ रही पैकेजिंग लागत में करीब 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है.

इससे डेयरी कंपनियों पर भारी दबाव बन रहा है, क्योंकि दूध जैसे जरूरी उत्पाद के दाम बढ़ाना आसान नहीं होता. कंपनियां फिलहाल कीमत बढ़ाने से बच रही हैं, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे, तो कीमतों में इजाफा करना मजबूरी बन सकता है.

प्लास्टिक क्यों हो रहा है महंगा?

प्लास्टिक की कीमतों में अचानक तेजी का सीधा संबंध पेट्रोलियम उत्पादों से है. प्लास्टिक कच्चे तेल से बनता है और जब कच्चे तेल या गैस की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर प्लास्टिक पर भी पड़ता है.

प्लास्टिक बनने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है. सबसे पहले कच्चे तेल को रिफाइन करके नैफ्था (naphtha) निकाला जाता है. इसके बाद इसे बहुत ज्यादा तापमान (800–900°C) पर ‘क्रैकिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे एथिलीन और प्रोपिलीन जैसे केमिकल बनते हैं. फिर इन्हें पॉलिमराइजेशन प्रक्रिया के जरिए प्लास्टिक में बदला जाता है. अंत में छोटे-छोटे दानों (pellets) के रूप में इसे फैक्ट्री में भेजा जाता है, जहां से पैकेट और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं.

जब कच्चे तेल और गैस की कीमत बढ़ती है या सप्लाई बाधित होती है, तो पूरी चेन महंगी हो जाती है और यही वजह है कि दूध के पैकेट तक की लागत बढ़ रही है.

रिलायंस जैसी कंपनियों की अहम भूमिका

भारत में पेट्रोकेमिकल सेक्टर में बड़ी कंपनियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज अहम भूमिका निभाती हैं. ये कंपनियां कच्चे तेल को प्रोसेस करके प्लास्टिक और अन्य केमिकल उत्पाद तैयार करती हैं. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो इन कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर सीधे बाजार में प्लास्टिक के दाम पर पड़ता है. यानी अगर वैश्विक संकट बढ़ता है, तो घरेलू स्तर पर पैकेजिंग और उससे जुड़े उद्योगों पर दबाव और बढ़ सकता है.

क्या आने वाला है दूध का संकट?

डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर LPG और पैकेजिंग की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो दूध की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. खासकर छोटे और मझोले डेयरी प्लांट सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक ईंधन या संसाधन नहीं हैं.

गुजरात जैसे बड़े डेयरी राज्य में पहले ही LPG सप्लाई में कटौती की जा चुकी है, जिससे उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो इसका असर पूरे देश में देखने को मिल सकता है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?

अभी तक कंपनियां कीमत बढ़ाने से बच रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ती लागत का असर ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सकता. अगर संकट जारी रहा, तो दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद महंगे हो सकते हैं. यानी यह संकट सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम उपभोक्ता की जेब पर भी सीधा असर डालेगा.

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