ईरान- इजरायल के बीच जारी जंग के चलते बढ़ता ऊर्जा संकट अब सिर्फ रसोई के बजट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आपके दूध की सप्लाई और सुबह की चाय पर भी असर डाल सकता है. महाराष्ट्र के कई डेयरी मालिकों ने चेतावनी दी है कि LPG की कमी के चलते दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग बुरी तरह प्रभावित हो रही है. इससे आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई कम होने की संभावना है. ऐसे में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी भी हो सकती है. हालांकि, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने एलपीजी की आपूर्ति में रुकावटें आने की बात से इंकार किया है.
दरअसल, दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म करना यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसमें काफी ईंधन की खपत होती है. वहीं, ईरान- इजरायल जंग के चलते देश में रसोई गैस की किल्लत हो गई है. ऐसे में गैस की अनियमित सप्लाई के कारण छोटी और मध्यम डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना अब बड़ी चुनौती बन गया है. वहीं, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि एलपीजी की आपूर्ति में रुकावटें अब इतनी बड़ी चिंता की बात नहीं हैं.. हालांकि सरकार अभी भी पश्चिम एशिया संकट के बीच स्थिति पर निगरानी रख रही है.
पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को गैस नहीं मिल रही
बड़ी बात यह है कि डेयरी उद्योग के पास अब प्रयाप्त मात्रा में दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन नहीं हैं. उद्योग इनकी कमी से जूझ रहा है. क्योंकि पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है. वहीं, गोवर्धन डेयरी के संस्थापक अध्यक्ष, देवेन्द्र शाह ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है कि दूध के पाउच और कार्टन उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि इन्हें बनाने वाली फैक्ट्रियों को गैस नहीं मिल रही. हमारे पास केवल 10 दिन का स्टॉक बचा है. वहीं, चेम्बूर की सुरेश डेयरी के प्रबंधक शरीब शेख ने कहा ने प्लास्टिक बैग की कमी है और अगर यह जारी रही तो 10 दिन में हमें संकट का सामना करना पड़ेगा.
छोटी डेयरी अधिक दूध स्टोर नहीं कर सकती
गैस की कमी ने सिर्फ पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि दूध की मांग को भी प्रभावित किया है. होटल, रेस्टोरेंट और थोक खरीदार अपने ऑर्डर कम कर रहे हैं, क्योंकि वहां भी LPG की कमी के कारण मेनू छोटा किया जा रहा है. बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह का कहना है कि हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हो गए. छोटी डेयरियों के पास ज्यादा दूध स्टोर करने की सुविधा नहीं है, इसलिए उन्हें गाय और भैंस का दूध कम दाम पर बेचना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अब हमें स्टॉक को आधे दाम में खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. छोटी डेयरी अधिक दूध स्टोर नहीं कर सकती. अतिरिक्त दूध का क्या करें?”
क्या कहते हैं एमडी जयेन मेहता
अच्छी बात यह है कि भारत की सबसे बड़ी डेयरी अमूल अपनी पैकेजिंग सामग्री खुद बनाती है और दूध की कमी का सामना नहीं कर रही. एमडी जयेन मेहता ने कहा है कि अमूल हर दिन 350 लाख लीटर दूध संभालता है. गुजरात में हमारे डेयरी प्लांट्स को गैस की जरूरत का 80 फीसदी हिस्सा मिलता है. बाकी ऊर्जा की जरूरत एलडीओ (डीजल) और अन्य ईंधन से पूरी की जा रही है. सरकार के इस सहयोग के कारण अमूल के दूध और उत्पाद की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई है. मेहता ने कहा कि हमें पैकेजिंग सामग्री की कोई कमी नहीं है. हम दूध, दही और मठ्ठा के पाउच के लिए अपनी पैकेजिंग फिल्म खुद बनाते हैं. हर दिन लगभग पांच करोड़ पाउच तैयार होते हैं. वहीं, मदर डेयरी के एक प्रवक्ता ने कहा कि हमारे दूध पाश्चुरीकरण में PNG और अन्य ईंधन का उपयोग होता है और फिलहाल हमें किसी तरह की कमी की उम्मीद नहीं है.