महाराष्ट्र: चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी, 1 अप्रैल तक 988.79 लाख क्विंटल प्रोडक्शन.. जानें जिलावार आंकड़े

महाराष्ट्र के चीनी उद्योग में धीरे-धीरे संरचना में बदलाव देखा जा रहा है, जहां अब निजी मिलें सहकारी इकाइयों से थोड़ी ज्यादा हो गई हैं. इस सीजन में कुल 210 मिलों में से 107 निजी हैं और 103 सहकारी. यह रुझान खासकर सोलापुर और नांदेड में दिखाई दे रहा है, जहां पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेश लगातार बढ़ा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 3 Apr, 2026 | 10:30 PM

Maharashtra Sugar Production: महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन बोढ़तरी दर्ज की गई है. ये बढ़ोतरी 2025- 26 के क्रशिंग सीजन के दौरान की है. इससे महाराष्ट्र में गन्ने की अधिक उपलब्धता और मिलों के बेहतर प्रदर्शन का अंदाजा लगाया जा सकता है. 1 अप्रैल तक राज्य में कुल चीनी उत्पादन 988.79 लाख क्विंटल पहुंच गया, जो पिछले सीजन के 806.78 लाख क्विंटल से काफी ज्यादा है. इसी के साथ गन्ना पेराई भी बढ़कर 1,043.17 लाख टन हो गई, जो एक साल पहले 852.65 लाख टन थी. हालांकि रिकवरी रेट लगभग स्थिर रहा और 9.48 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 9.46 प्रतिशत से थोड़ा ही अधिक है. इससे साफ है कि उत्पादन में वृद्धि मुख्य रूप से ज्यादा मात्रा में गन्ने की पेराई के कारण हुई है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र की चीनी अर्थव्यवस्था में पश्चिमी महाराष्ट्र का योगदान सबसे ज्यादा है. कोल्हापुर डिवीजन ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां रिकवरी रेट 11.02 प्रतिशत दर्ज हुआ और उत्पादन 231.91 लाख क्विंटल रहा, जो राज्य के औसत से काफी ऊपर है. पुणे डिवीजन ने गन्ना पेराई के मामले में सबसे आगे रहते हुए 224.99 लाख टन पेराई की, जिससे मिलों की मजबूत क्षमता दिखी. वहीं, 49 मिलों के साथ सबसे ज्यादा मिलों वाला सोलापुर डिवीजन रिकवरी रेट  सिर्फ 8.6 प्रतिशत दर्ज कर पाया, जो बड़े पैमाने के बावजूद दक्षता में चुनौतियों को दर्शाता है.

निजी मिलें सहकारी इकाइयों से थोड़ी ज्यादा हो गई हैं

महाराष्ट्र के चीनी उद्योग में धीरे-धीरे संरचना में बदलाव देखा जा रहा है, जहां अब निजी मिलें सहकारी इकाइयों से थोड़ी ज्यादा हो गई हैं. इस सीजन में कुल 210 मिलों में से 107 निजी हैं और 103 सहकारी. यह रुझान खासकर सोलापुर और नांदेड में दिखाई दे रहा है, जहां पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेश लगातार बढ़ा है. हालांकि, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन में असमानता बनी हुई है. पश्चिमी और मध्य महाराष्ट्र अच्छे प्रदर्शन में आगे हैं, जबकि पूर्वी क्षेत्र पीछे हैं. नागपुर डिवीजन में रिकवरी रेट  सिर्फ 4.13 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से काफी कम है और गन्ने की गुणवत्ता और संचालन क्षमता की समस्याओं को दर्शाता है. अमरावती डिवीजन रिकवरी में बेहतर है, लेकिन इसकी छोटी पैमाने की वजह से कुल उत्पादन में योगदान कम है.

बढ़ोतरी घरेलू चीनी की कीमतों पर दबाव डाल सकती है

इस सीजन में शुरू हुई 210 मिलों में से 187 ने पहले ही गन्ना पेराई पूरी कर ली है. उत्पादन में बढ़ोतरी घरेलू चीनी की कीमतों  पर दबाव डाल सकती है, जब तक इसे अधिक निर्यात या ईथेनॉल उत्पादन के लिए डाइवर्ट न किया जाए. सरकार के ईथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने से बची हुई चीनी का एक हिस्सा ईथेनॉल में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मिलों को स्टॉक संभालने और नकदी बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में रिकवरी रेट में बड़ी असमानता दिख रही है, इसलिए कमजोर क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाने के लिए बेहतर कृषि पद्धतियों और तकनीकी सुधार में निवेश की जरूरत है.

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Published: 3 Apr, 2026 | 10:30 PM
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