Crop Area: जायद फसलों की बुवाई इस सप्ताह पूरी होने वाली है. 22 मई तक देश में 86.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जायद फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के इसी समय के 83.50 लाख हेक्टेयर की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है. जायद फसलें रबी की कटाई और खरीफ की बुवाई के बीच उगाई जाती हैं. ऐसे इस साल धान और मूंग को छोड़कर लगभग सभी जायद फसलों का रकबा बढ़ा है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उड़द पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के ऊपर बोनस देने की घोषणा का असर किसानों के फैसलों में दिखा है, जिससे उड़द की बुवाई का क्षेत्र बढ़ गया है. वहीं, देश में मूंग का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य होने के बावजूद मध्य प्रदेश में गर्मी की मूंग का रकबा घटने से इसकी कुल बुवाई में कमी दर्ज की गई है.
कृषि मंत्रालय की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जायद सीजन में धान की बुवाई 4 प्रतिशत घटकर 31.05 लाख हेक्टेयर रह गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 32.42 लाख हेक्टेयर थी. दूसरी ओर, मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) की खेती में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन फसलों का कुल रकबा 12 प्रतिशत बढ़कर 16.01 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जो पिछले साल 14.25 लाख हेक्टेयर था.
मक्का की बुवाई 18 फीसदी बढ़ी
मोटे अनाजों में मक्का की बुवाई सबसे ज्यादा बढ़ी है. इसका रकबा 18 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले 8.5 लाख हेक्टेयर था. बाजरा की खेती भी बढ़कर 5.4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 5.2 लाख हेक्टेयर थी. वहीं, रागी का रकबा 0.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.22 लाख हेक्टेयर और ज्वार का रकबा 0.36 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.37 लाख हेक्टेयर हो गया है. इससे साफ है कि इस साल किसानों का रुझान मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ा है.
दलहनी फसलों की बुवाई बढ़कर 27.91 लाख हेक्टेयर
जायद सीजन में दलहनी फसलों की बुवाई बढ़कर 27.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 27.26 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि, मूंग की बुवाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. इस साल मूंग का रकबा 23.01 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 23.49 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है. दूसरी ओर, उड़द की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. उड़द का रकबा 29 प्रतिशत बढ़कर 4.60 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले 3.58 लाख हेक्टेयर था. मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात जायद दलहन की प्रमुख उत्पादक राज्य हैं. जायद दलहन फसलें खरीफ सीजन में उत्पादन कम होने की स्थिति में देश की दाल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती हैं.
उड़द की खेती पर किसानों को प्रोत्साहन
इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को जायद सीजन में मूंग की बजाय उड़द की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया. सरकार ने उड़द पर 7,800 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की. माना जा रहा है कि इसी फैसले का असर उड़द की बुवाई में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला है.
तिल की खेती में बढ़ोतरी
इस साल जायद सीजन में तिलहनी फसलों की बुवाई में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तिलहन फसलों का कुल रकबा बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 9.58 लाख हेक्टेयर था. इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मूंगफली की खेती में देखी गई, जिसका रकबा 4.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.51 लाख हेक्टेयर हो गया. वहीं, तिल (सेसमम) की बुवाई भी 4.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.07 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है.
1.97 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने 2025-26 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए जायद फसलों से कुल 1.97 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 1.21 करोड़ टन चावल, 40 लाख टन मक्का, 11.4 लाख टन मोटे अनाज और 23.9 लाख टन दलहन उत्पादन का लक्ष्य शामिल है. इसके अलावा बाजरा का उत्पादन लक्ष्य 11 लाख टन, उड़द का 3.2 लाख टन, मूंग का 20.7 लाख टन और तिलहनों का 13.7 लाख टन निर्धारित किया गया है. सरकार को उम्मीद है कि बढ़े हुए रकबे और बेहतर उत्पादन से खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन में मजबूती आएगी.
कुल 1.91 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन
पिछले साल जायद सीजन में कुल 1.91 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ था. इसमें 1.13 करोड़ टन चावल, 38.5 लाख टन मक्का, 12.6 लाख टन मोटे अनाज और 27.2 लाख टन दलहन शामिल थे. इसके अलावा बाजरा का उत्पादन 12.3 लाख टन, उड़द का 3.5 लाख टन, मूंग का 23.7 लाख टन और तिलहन का 13.3 लाख टन रहा था. पहले जायद फसलों के आंकड़ों को खरीफ या रबी सीजन के साथ ही जोड़ा जाता था, लेकिन कुछ साल पहले सरकार ने इनके आंकड़े अलग से संकलित करना शुरू किया. इससे जायद फसलों की वास्तविक स्थिति और योगदान का बेहतर आकलन संभव हो पाया है. पिछले पांच वर्षों में जायद फसलों का औसत रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 83.92 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था. कुल 35.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन में जायद फसलों की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत रही, जो कृषि उत्पादन में इस सीजन के बढ़ते महत्व को दर्शाती है.