Egg Price Hike: हैदराबाद में अंडों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है. सिर्फ दो हफ्तों में ही प्रति अंडे की कीमत में करीब 3 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है. करीब दो हफ्ते पहले जहां अंडा 4 रुपये में मिल रहा था, अब वही रिटेल बाजार में रेट 7 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गया है. शहर के किराना स्टोर्स में कीमतें लगभग एक जैसी बनी हुई हैं, जबकि थोक बाजार में अंडे 6.30 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिक रहे हैं.
पोल्ट्री किसानों का कहना है कि अंडों की कीमतों में तेजी बढ़ने की वजह गर्मी और पक्षियों की ज्यादा मौत है. उनका कहना है कि गर्मियों में फार्म में पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है और उत्पादन कम हो जाता है, लेकिन अंडों की मांग स्थिर रहती है. ऐसे में जब सप्लाई कम हो जाती है, तो नुकसान की भरपाई के लिए अंडों और मुर्गियों की कीमतें बढ़ा दी जाती हैं. रंगा रेड्डी जिले के एक पोल्ट्री फार्म मालिक ने बताया कि गर्मियों में पक्षियों की मृत्यु दर अन्य महीनों की तुलना में लगभग 30 फीसदी ज्यादा होती है.
मार्केट में चिकन का क्या है रेट
फिलहाल बाजार में चिकन मांस की कीमत 240 रुपये प्रति किलो है, जबकि जिंदा मुर्गा 170 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है. मल्लेपल्ली के चिकन दुकानदार मोहम्मद नजीर ने ‘तेलंगाना टुडे’ को बताया कि पिछले कुछ दिनों में चिकन की कीमतों में सिर्फ थोड़ा ही इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि गर्मियों में लोग अलग-अलग कारणों से चिकन कम खरीदते हैं, इसलिए खुदरा मांग घट जाती है. हालांकि होटल और कैटरिंग सेक्टर में सप्लाई सामान्य बनी हुई है और उस पर कोई असर नहीं पड़ा है.
- जंग का देखने लगा असर, अंडा निर्यात में 85 फीसदी तक गिरावट.. बढ़ गया शिपिंग खर्च
- आग लगाने से 700 एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक, पूर्व CM ने की मुआवजे की मांग
- प्याज पैदावार में 29 फीसदी गिरावट की आशंका, रकबा भी हुआ कम.. बारिश से फसल चौपट
- UP में किसानों से होगी 20 लाख टन आलू की खरीद, सरकार से मिली मंजूरी.. इतने रुपये क्विंटल होगा रेट
तेलंगाना के रांगारेड्डी, मेडक, संगारेड्डी, विकाराबाद, यादाद्री भुवनगिरी, सिद्दीपेट और महबूबनगर जिलों में पोल्ट्री फार्म स्थित हैं. मार्च में ईरान–इजराइल/अमेरिका संघर्ष के कारण निर्यात प्रभावित होने के बाद अंडों की कीमतों में थोड़े समय के लिए गिरावट आई थी.
माल ढुलाई की लागत बढ़ गई
वहीं, खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष का असर अब तमिलनाडु के नमक्कल में पोल्ट्री निर्यात पर असर पड़ा है. माल ढुलाई की लागत बढ़ने और शिपिंग रूट में दिक्कतों के कारण निर्यात में 85 फीसदी तक गिरावट आई है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, जहाजों की उपलब्धता कम हो गई है और युद्ध के खतरे की वजह से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है. इससे पिछले कुछ हफ्तों में निर्यात काफी धीमा हो गया है और व्यापारियों को अपनी शिपमेंट कम करनी पड़ रही है.
निर्यात में आई भारी गिरावट
ऑल इंडिया पोल्ट्री प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि पहले खाड़ी देशों में रोजाना लगभग 20 कंटेनर भेजे जाते थे, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 3 कंटेनर रह गया है. उन्होंने कहा कि इस गिरावट से पूरे पोल्ट्री निर्यात कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि फरवरी के अंत में जब तनाव बढ़ गया था, तब भेजा गया एक शिपमेंट कई दिनों तक समुद्र में फंसा रहा. इससे निर्यातकों में अपने माल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी.