Egg Price Hike: अंडे की कीमत में बढ़ोतरी, 100 रुपये दर्जन हुआ रेट.. चिकन भी महंगा

गोवा में चिकन और अंडों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. कम सप्लाई, बढ़ती पोल्ट्री फीड कीमत और मौसम खराब होने के कारण उत्पादन कम हुआ. त्योहारों में मांग बढ़ने से रिटेल कीमतें बढ़ीं. छोटे होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू बजट पर असर पड़ा है. फिलहाल स्थिरता की उम्मीद नहीं है.

Kisan India
नोएडा | Published: 11 Jan, 2026 | 06:00 AM

Egg Price Hike: गोवा में चिकन और अंडों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसका कारण कम सप्लाई, बढ़ती पोल्ट्री फीड कीमतें और अनुकूल मौसम का न होना बताया जा रहा है. यह वृद्धि त्योहारों के बाद सामान्य रूप से होने वाली कीमत स्थिरता के उलट है. कोलवा में चिकन की कीमत लगभग 200 रुपये प्रति किलो और एक दर्जन अंडे के रेट 100 रुपये हो गए हैं. पनजी में भी हालात ऐसे ही हैं. चिकन 190 रुपये प्रति किलो और अंडे 95 रुपये प्रति दर्जन बिक रहे हैं. मर्गाओ के चिकन विक्रेता के अनुसार, मौसम खराब होने और फीड की कीमतें बढ़ने की वजह से उत्पादन कम हो गया है. विक्रेता का कहना है कि एक चिकन को पाला-बढ़ाने में लगभग डेढ़ महीने लगते हैं. इस दौरान किसान फीड, पानी और बिजली पर बढ़ती लागत झेलते हैं, जो आखिरकार बाजार कीमतों में दिखती है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक, खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवार, इस बढ़ोतरी से अपने घर के खाने-पीने के बजट पर दबाव महसूस कर रहे हैं. अंडे प्रोटीन का सस्ता स्रोत हैं और चिकन अक्सर लाल मांस की तुलना में सस्ता होने के कारण पसंद किया जाता है. गोवा में चिकन और अंडों की अचानक बढ़ी कीमतों का असर लोगों पर साफ महसूस हो रहा है. बेनौलिम के निवासी सेबेस्टियन रोड्रिग्स कहते हैं कि यह बढ़ोतरी जोरदार है.

गोवा पड़ोसी राज्यों से पोल्ट्री सप्लाई पर निर्भर है

व्यापारियों का कहना है कि गोवा पड़ोसी राज्यों से पोल्ट्री सप्लाई पर निर्भर है, इसलिए वहां कीमत बढ़ी तो राज्य के रिटेल रेट्स पर भी असर पड़ता है. राज्य को रोजाना करीब 7-8 लाख अंडे आयात करने पड़ते हैं, जबकि रोजाना की जरूरत लगभग सात लाख अंडे की है. त्योहारों के दौरान मांग 20 फीसदी बढ़ गई, और उत्पादन कम, मौसमी मांग और बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत ने कीमतें और बढ़ा दी हैं.

क्यों महंगे हो रहे हैं चिकन और अंडे

चिकन और अंडे की बढ़ती कीमतों से छोटे होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस भी प्रभावित हैं. म्यूकेश कार्की, जो तंदूरी रेस्टोरेंट चलाते हैं, बताते हैं कि कच्चे माल की महंगाई से मुनाफा घट रहा है. उन्होंने कहा कि साथ ही मेन्यू की कीमत बढ़ाना मुश्किल है, क्योंकि ग्राहकों पर असर पड़ेगा. फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू बजट और छोटे व्यवसायों पर और दबाव डाल सकती है. पनजी के एक विक्रेता ने कहा कि हम उम्मीद कर रहे थे कि जनवरी के मध्य तक कीमतें स्थिर होंगी. अब बस इंतजार करना ही होगा. 

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Published: 11 Jan, 2026 | 06:00 AM

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