एशिया की सबसे बड़ी मंडी में कम हुई टमाटर की आवक, फिर भी नहीं बढ़े रेट.. 22 रुपये किलो कीमत

आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले थोक बाजार में टमाटर की आवक कम होने के बावजूद कीमतें स्थिर हैं. ग्रेड-1 टमाटर 30 रुपये प्रति किलो बिका. निर्यात में गिरावट और उत्तर भारत में उत्पादन बढ़ने के कारण बाहरी मांग कम है. किसानों को नुकसान हो रहा है.

नोएडा | Updated On: 11 Jan, 2026 | 06:45 PM

Tomato Market Rate: आंध्र प्रदेश में टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हो रही है. खासकर अनामय्या जिले के मदनपल्ले थोक बाजार में टमाटर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आ रहा है. हालांकि, टमाटर की आवक में भी गिरावट आई है. इसके बावजूद कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. शनिवार को मंडी में टमाटर की आवक केवल 45 टन दर्ज की गई, जो 2025- 26 सीजन में अब तक की सबसे कम दैनिक आवक है.

एक हफ्ते में इतने रुपये किलो कम हो गई कीमत

आवक कम होने के बावजूद कीमतें कम बनी रहीं, जिससे बड़े उपभोक्ता बाजारों में मांग कमजोर  दिखाई दे रही है. शनिवार को ग्रेड-1 टमाटर 30 रुपये प्रति किलो और दूसरे ग्रेड का टमाटर 22 रुपये प्रति किलो में बिका है. एक हफ्ते पहले ही ग्रेड-1 टमाटर 47 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा था. दरअसल, मदनपल्ले, जिसे एशिया का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादन केंद्र माना जाता है. फिलहाल रबी फसल की अंतिम चरण में है. सर्दियों के बाद की फसलें अभी सिर्फ बीज और पौध अवस्था में हैं, इसलिए अगले दो महीने तक बाजार में टमाटर की आवक कम रहने की उम्मीद है.

राज्य के बाहर निर्यात में भारी गिरावट आई है

बाजार अधिकारियों का कहना है कि आवक कम होने के बावजूद कीमतें नहीं बढ़ रही हैं, क्योंकि राज्य के बाहर निर्यात में भारी गिरावट  आई है. इस साल उत्तर भारत के राज्यों में टमाटर की खेती बहुत बढ़ गई है, जिससे उनकी मदनपल्ले पर निर्भरता कम हो गई है. किसानों ने कहा कि तमिलनाडु के बाजार अब कर्नाटक से टमाटर से भरे हैं, जबकि हैदराबाद के बाजार छत्तीसगढ़ और झारखंड से टमाटर खरीद रहे हैं. इसलिए मदनपल्ले का टमाटर फिलहाल सिर्फ तिरुपति, अनामय्या और कडपा जिलों के स्थानीय बाजारों तक ही सीमित है, जबकि बेंगलुरु और चेन्नई के लिए बेहद सीमित मात्रा में टमाटर की सप्लाई की जा रही है.

बाहरी मांग की कमी से किसानों को हो रहा है नुकसान

किसान कोक्कांति मंजू ने कहा कि उपज बहुत कम हो गई है, लेकिन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. बाहरी मांग की कमी से किसानों को नुकसान हो रहा है. बाजार अधिकारियों का अनुमान है कि मार्च तक नई फसल आने तक कीमतें उतार-चढ़ाव वाली बनी रह सकती हैं.

Published: 11 Jan, 2026 | 10:30 PM

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