इस राज्य में किसान नहीं कर रहे आम की तुड़ाई, पेड़ों पर सड़ने के लिए छोड़ दी फसल.. जानें वजह

किसानों का कहना है कि आम से बने जूस और अन्य उत्पाद बाजार में ऊंची कीमत पर बिक रहे हैं, लेकिन उन्हें कच्चे आम का बेहद कम दाम मिल रहा है. खास बात यह है कि आम किसानों की यह समस्या सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है. हाल के हफ्तों में देश के कई राज्यों में आम उत्पादक किसान इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 27 Jun, 2026 | 04:31 PM

Mango Farmers: तमिलनाडु के आम किसानों को इस साल भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. आम की कीमतों में बड़ी गिरावट आने और मांग कम होने के कारण कई किसानों ने फसल को पेड़ों पर ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है. कुछ किसान तो नुकसान से बचने के लिए अपने आम के बाग तक काटने लगे हैं. किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश, बाजार में जरूरत से ज्यादा आम की आवक और प्रसंस्करण (पल्प बनाने) वाली इकाइयों की कम खरीद के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. तोतापुरी आम की खरीद लगातार तीसरे साल प्रभावित हुई है, जिससे बड़ी मात्रा में आम का स्टॉक जमा हो गया है.

न्यू एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, मदुरै जिले के मेलूर तालुक में तोतापुरी आम की कीमत  घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है. इतनी कम कीमत मिलने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट में हैं. भारत दुनिया के करीब 50 प्रतिशत आम का उत्पादन करता है और हर साल लगभग 2.6 करोड़ टन आम पैदा होता है. लेकिन इस बार मांग कमजोर रहने और अधिक उत्पादन के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है. इसी वजह से देश के कई आम उत्पादक क्षेत्रों में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने और सरकारी हस्तक्षेप की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

गंभीर संकट में आम की खेती करने वाले किसान

मदुरै क्षेत्र में एक हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में आम की खेती करने वाले किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. उत्पादन लागत और मजदूरी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन किसानों को आम का उचित दाम नहीं मिल  रहा. स्थिति यह है कि किसानों को खेत पर तोतापुरी आम के सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं, जबकि यही आम खुदरा बाजार में 40 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहा है.

आम के पेड़ तक काटने शुरू कर दिए किसान

कोट्टामपट्टी यूनियन के कई किसानों ने भारी नुकसान से परेशान होकर अपने आम के पेड़ तक काटने शुरू कर दिए हैं. किसानों का कहना है कि खेती जारी रखना अब घाटे का सौदा बन गया है. स्थानीय किसान जीवा ने कहा कि किसान हर साल प्रति एकड़ आम के बागों की देखभाल और उत्पादन पर करीब 1 लाख रुपये खर्च करते हैं. इसके बावजूद उन्हें न तो फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही लागत के अनुरूप मुनाफा. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में आम की कीमतों में लगातार गिरावट आई है. खेत पर आम का भाव पहले 5 रुपये प्रति किलो था, जो बाद में 4 रुपये और अब घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो रह गया है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.

आम से बने उत्पाद बाजार में ऊंची कीमत पर बिक रहे हैं

किसानों का कहना है कि आम से बने जूस और अन्य उत्पाद बाजार में ऊंची कीमत पर बिक रहे हैं, लेकिन उन्हें कच्चे आम का बेहद कम दाम मिल रहा है. खास बात यह है कि आम किसानों की यह समस्या सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है. हाल के हफ्तों में देश के कई राज्यों में आम उत्पादक किसान इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं. किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने और सरकार से हस्तक्षेप की मांग को लेकर कई जगह प्रदर्शन भी कर रहे हैं.

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