भारत की ‘एग सिटी’ नामक्कल में संकट, अंडों के दाम गिरने से किसानों को रोजाना करोड़ों का नुकसान
नामक्कल भारत का सबसे बड़ा अंडा उत्पादन केंद्र है. यहां प्रतिदिन लगभग 6 से 7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है. ये अंडे देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में भी भेजे जाते हैं. संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान और अन्य खाड़ी देशों में भारतीय अंडों की अच्छी मांग रहती है.
Namakkal poultry crisis: तमिलनाडु का नामक्कल जिला भारत में अंडा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. इसे देश में “एग सिटी ऑफ इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है. यहां हजारों पोल्ट्री फार्म हैं, जहां हर दिन करोड़ों अंडों का उत्पादन होता है. लेकिन इन दिनों नामक्कल का पोल्ट्री उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंडों का निर्यात अचानक रुक गया है, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ा है. इसी वजह से कई निर्यातकों ने फिलहाल अंडों की सप्लाई रोक दी है. इसका सीधा असर नामक्कल के पोल्ट्री उद्योग पर पड़ रहा है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में अंडे खाड़ी देशों में भेजे जाते हैं.
रोजाना करोड़ों अंडों का उत्पादन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नामक्कल भारत का सबसे बड़ा अंडा उत्पादन केंद्र है. यहां प्रतिदिन लगभग 6 से 7 करोड़ अंडों का उत्पादन होता है. ये अंडे देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में भी भेजे जाते हैं. संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान और अन्य खाड़ी देशों में भारतीय अंडों की अच्छी मांग रहती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात से स्थानीय बाजार की कीमतें संतुलित रहती थीं. लेकिन जैसे ही निर्यात रुका, बड़ी मात्रा में अंडे घरेलू बाजार में आने लगे. इससे अचानक आपूर्ति बढ़ गई और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई.
बाजार में अंडों की अधिकता से गिरे दाम
निर्यात बंद होने के बाद जो अंडे विदेश भेजे जाने थे, वे अब स्थानीय बाजार में आ रहे हैं. इससे गोदामों और पोल्ट्री फार्मों में अंडों का स्टॉक तेजी से बढ़ गया है. बाजार में आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतों पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है.
पिछले दो सप्ताह में नामक्कल में अंडों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (NECC) ने भी खरीद कीमतों में कई बार कटौती की है. पहले जहां एक अंडे की कीमत करीब 5.40 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 4.30 रुपये तक पहुंच गई है. कई जगहों पर किसानों को इससे भी कम कीमत पर अंडे बेचने पड़ रहे हैं.
मांग में कमी से और बढ़ी परेशानी
इस समय अंडों की मांग भी अपेक्षाकृत कमजोर है, जिससे समस्या और बढ़ गई है. गर्मियों के मौसम में आमतौर पर अंडों की खपत कम हो जाती है. इसके अलावा रमजान के दौरान कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में दिन के समय भोजन कम किया जाता है. वहीं ईसाई समुदाय में चल रहे लेंट (उपवास) के कारण भी कुछ जगहों पर अंडों की खपत घट जाती है. इन सभी कारणों से बाजार में मांग कमजोर हो गई है, जबकि आपूर्ति लगातार बढ़ रही है. परिणामस्वरूप पोल्ट्री किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
हर दिन करोड़ों रुपये का नुकसान
उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि नामक्कल के पोल्ट्री क्लस्टर को रोजाना करीब 5 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है. हजारों किसान और छोटे व्यापारी इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कई पोल्ट्री फार्मों के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है.
सरकार से मदद की मांग
इस संकट से उबरने के लिए किसान और निर्यातक सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार को नए निर्यात बाजार तलाशने, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बढ़ाने और घरेलू बाजार में अतिरिक्त अंडों की खपत बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए.
किसानों का मानना है कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो पोल्ट्री उद्योग की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है. कई छोटे किसान अपने फार्म चलाने में भी मुश्किल महसूस कर सकते हैं.
देश के लिए महत्वपूर्ण है नामक्कल का पोल्ट्री सेक्टर
नामक्कल केवल तमिलनाडु ही नहीं बल्कि पूरे देश के पोल्ट्री उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यहां एक हजार से अधिक पोल्ट्री फार्म, हैचरी, फीड मिल और निर्यातक कंपनियां काम करती हैं. यहां से अंडों की आपूर्ति सरकारी पोषण योजनाओं, घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक होती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होगी और निर्यात दोबारा शुरू होगा, बाजार में संतुलन लौट सकता है. लेकिन तब तक नामक्कल का पोल्ट्री उद्योग अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है.