Onion Export: महाराष्ट्र से प्याज के निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 में तेज बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान निर्यात 10.59 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5 लाख टन था. यानी निर्यात दोगुने से भी ज्यादा हो गया है. निर्यातकों के अनुसार, इसका मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों में ढील देना है. वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने प्याज के निर्यात पर कई पाबंदियां लगाई थीं, जिनमें 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) और 40 फीसदी का भारी निर्यात शुल्क शामिल था.
हालांकि बाद में सरकार ने MEP हटा दिया और 13 सितंबर 2024 को निर्यात शुल्क घटाकर 20 फीसदी कर दिया, लेकिन यह शुल्क 31 मार्च 2025 तक लागू रहा. इसी वजह से उस अवधि में प्याज के निर्यात पर असर पड़ा. APEDA के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज निर्यात से महाराष्ट्र ने 2,406 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1,742 करोड़ रुपये था.
निर्यात प्रतिबंधों में ढील से तेजी
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HPEA) के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि निर्यात प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज की शिपमेंट तेजी से बढ़ी और मार्च तक यह 15.47 लाख टन तक पहुंच गई. उन्होंने कहा कि पाबंदियां हटने से निर्यात की मात्रा और कमाई दोनों में बढ़ोतरी हुई, जिसका सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र को मिला.
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15.47 लाख टन प्याज का निर्यात
राष्ट्रीय स्तर पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से 15.47 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया, जिससे 3,515 करोड़ रुपये की आय हुई. यह मात्रा पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 11.47 लाख टन से अधिक है. हालांकि निर्यात की मात्रा बढ़ी है, लेकिन कुल कमाई पिछले वित्त वर्ष से कम रही. 2024-25 में प्याज निर्यात से 3,832 करोड़ रुपये की आय हुई थी. यह अंतर कीमतों में बदलाव और सरकारी नीतियों के असर को दर्शाता है.
प्याज निर्यात में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के प्याज निर्यात में महाराष्ट्र का दबदबा बना रहा. देश के कुल प्याज निर्यात में लगभग 68 फीसदी हिस्सा अकेले महाराष्ट्र का रहा. राज्य के भीतर नासिक जिला सबसे बड़ा केंद्र बना रहा, जिसने महाराष्ट्र के कुल प्याज निर्यात में करीब 80 से 90 फीसदी योगदान दिया. इस साल एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिला कि भारत के प्याज निर्यात बाजारों में विविधता बढ़ी. पहले बांग्लादेश भारतीय प्याज का सबसे बड़ा खरीदार था, लेकिन अब उसकी हिस्सेदारी घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 42 फीसदी से सिर्फ 6 फीसदी रह गई.
2026-27 में प्याज निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद
इसके बजाय निर्यातकों ने श्रीलंका, यूएई (दुबई), मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया और कई खाड़ी देशों जैसे नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की, जिससे निर्यात अधिक संतुलित हो गया. निर्यातकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में प्याज निर्यात में और बढ़ोतरी की उम्मीद है. उनका मानना है कि अगर केंद्र सरकार स्थिर निर्यात नीति बनाए रखती है और कोई नई पाबंदियां नहीं लगाती, तो भारत 2022-23 के स्तर को दोबारा हासिल कर सकता है, जब प्याज का निर्यात 25 लाख टन तक पहुंच गया था.