चार साल की रोक के बाद गेहूं आटा निर्यात शुरू, 5 लाख टन तक की अनुमति…किसानों को मिलेगी राहत

निर्यात की अनुमति मिलने के बाद उसकी वैधता छह महीने की होगी. यानी निर्यातक को तय समय के भीतर शिपमेंट पूरा करना होगा. यदि किसी कारण से समय सीमा बढ़ाने की जरूरत पड़ी, तो ऐसे मामलों पर विशेष एक्सिम सुविधा समिति अलग-अलग आधार पर फैसला करेगी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Jan, 2026 | 07:55 AM

wheat export: करीब चार साल बाद भारत सरकार ने गेहूं से जुड़े उत्पादों के निर्यात पर बड़ा फैसला लेते हुए बाजार को राहत का संकेत दिया है. केंद्र सरकार ने गेहूं आटा और उससे जुड़े अन्य उत्पादों के निर्यात की सीमित अनुमति दे दी है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश में गेहूं की उपलब्धता बेहतर मानी जा रही है और नई फसल को लेकर उम्मीदें मजबूत हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले से घरेलू बाजार और निर्यात दोनों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी.

5 लाख टन तक निर्यात की इजाजत

सरकार की अधिसूचना के अनुसार, अधिकतम 5 लाख टन गेहूं आटा और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है. इसके लिए पहली बार आवेदन 21 जनवरी से 31 जनवरी के बीच स्वीकार किए जाएंगे. इसके बाद हर महीने के अंतिम 10 दिनों में निर्यात की अनुमति के लिए आवेदन मांगे जाएंगे. यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक तय की गई कुल मात्रा पूरी नहीं हो जाती.

छह महीने तक मान्य रहेगी अनुमति

निर्यात की अनुमति मिलने के बाद उसकी वैधता छह महीने की होगी. यानी निर्यातक को तय समय के भीतर शिपमेंट पूरा करना होगा. यदि किसी कारण से समय सीमा बढ़ाने की जरूरत पड़ी, तो ऐसे मामलों पर विशेष एक्सिम सुविधा समिति अलग-अलग आधार पर फैसला करेगी. इससे साफ है कि सरकार नियमों के साथ-साथ व्यावहारिक पहलुओं को भी ध्यान में रख रही है.

किन इकाइयों को मिलेगा मौका

इस नीति का लाभ वही उठा सकेंगे, जिनके पास जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज होंगे. आटा मिल और गेहूं प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए आयात-निर्यात कोड औरFSSAI लाइसेंस अनिवार्य रखा गया है. वहीं व्यापारी निर्यातक भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास वैध दस्तावेज और आटा मिलों के साथ पुख्ता समझौता हो. इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल संगठित और भरोसेमंद कारोबारी ही निर्यात करें.

2022 के प्रतिबंध से अब राहत

गौरतलब है कि मई 2022 में भीषण गर्मी के कारण गेहूं की पैदावार प्रभावित हुई थी. उस समय घरेलू कीमतें तेजी से बढ़ने लगी थीं, जिसके बाद भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी. अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. बेहतर मौसम, बढ़ा हुआ रकबा और अच्छी फसल की उम्मीदों के बीच सरकार को आपूर्ति मजबूत दिख रही है, इसी कारण निर्यात पर आंशिक ढील दी गई है.

बाजार और किसानों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से आटा उद्योग को नए बाजार मिलेंगे और घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति का दबाव भी कम होगा. यदि उत्पादन ज्यादा होता है और कीमतों पर गिरावट का खतरा बनता है, तो निर्यात किसानों के लिए भी सहारा बन सकता है. कुल मिलाकर यह फैसला संकेत देता है कि सरकार अब आपूर्ति की स्थिति को लेकर ज्यादा आश्वस्त है और धीरे-धीरे निर्यात नीति में संतुलन बना रही है.

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