Wheat Farming : खेत में खड़ी हरी–भरी गेहूं की फसल देखकर किसान के चेहरे पर उम्मीद की चमक होती है. लेकिन यही उम्मीद तब टूट जाती है, जब कटाई के वक्त दाने हल्के निकलते हैं और पैदावार उम्मीद से कम रह जाती है. कई बार किसान सोचते हैं कि मौसम ने साथ नहीं दिया, लेकिन असली वजह खेत में डाले गए उर्वरक भी हो सकते हैं. सही समय और सही मात्रा में खाद न देना गेहूं की पैदावार पर सीधा असर डालता है.
आज भी कई किसान जानकारी के अभाव में या जल्दी मुनाफे की चाह में ज्यादा उर्वरक डाल देते हैं. इसका नुकसान सिर्फ फसल को ही नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी होता है. अगर गेहूं की खेती में थोड़ी समझदारी और संतुलन रखा जाए, तो कम लागत में भी अच्छा उत्पादन मिल सकता है.
गलत उर्वरक से घट सकती है पैदावार
उर्वरक फसल के लिए भोजन की तरह होते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा भोजन नुकसान भी कर सकता है. कई किसान यह सोचकर ज्यादा यूरिया या डीएपी डाल देते हैं कि फसल और अच्छी होगी. हकीकत यह है कि ज्यादा उर्वरक से पौधे कमजोर हो जाते हैं, जड़ें ठीक से विकसित नहीं होतीं और बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, समय पर खाद न मिलने से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और बालियां पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं.
बुवाई के समय क्या डालें, कितना डालें
गेहूं की अच्छी शुरुआत के लिए बुवाई के समय सही खाद देना बेहद जरूरी है. एक एकड़ खेत में बुवाई के वक्त संतुलित मात्रा में यूरिया, डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल करने से पौधों को शुरुआती ताकत मिलती है. इससे जड़ें मजबूत बनती हैं, पौधा तेजी से बढ़ता है और आगे चलकर बालियां अच्छी बनती हैं. शुरुआत सही होगी, तो फसल आखिरी तक मजबूत बनी रहती है.
सिंचाई के साथ उर्वरक का सही तालमेल
पहली सिंचाई गेहूं की फसल के लिए बहुत अहम होती है. इसी समय अगर जरूरत के अनुसार यूरिया दिया जाए, तो पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. दूसरी सिंचाई के बाद भी खेत की हालत देखकर खाद दी जा सकती है. ध्यान रखें कि हर सिंचाई पर खाद डालना जरूरी नहीं होता. जरूरत से ज्यादा यूरिया दाने की जगह सिर्फ पत्तियों को बढ़ा देता है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है.
संतुलन से ही मिलेगा अच्छा मुनाफा
चाहे गेहूं की बुवाई जल्दी की जाए या थोड़ी देर से, असली फर्क उर्वरक के सही इस्तेमाल से पड़ता है. संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और मिट्टी की सेहत का ध्यान रखकर किसान बेहतर पैदावार पा सकते हैं. कम लागत में ज्यादा उत्पादन का रास्ता ज्यादा खाद नहीं, बल्कि सही जानकारी और समझदारी है. जब किसान खेत की जरूरत को समझकर उर्वरक का इस्तेमाल करता है, तभी मेहनत का पूरा फल मिलता है.