Wheat Farming : खेती में थोड़ी-सी चूक और सही समय का इंतजार, दोनों ही फसल की सेहत पर बड़ा असर डालते हैं. गेहूं की खेती कर रहे कई किसान इन दिनों एक ही समस्या से जूझ रहे हैं-फसल की धीमी बढ़वार और पत्तियों में पीलापन. मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच अगर सही वक्त पर सही पोषक तत्व मिल जाएं, तो यही कमजोर दिखने वाली फसल शानदार पैदावार में बदल सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गेहूं की दूसरी सिंचाई के बाद यूरिया के साथ जिंक का सही इस्तेमाल किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.
दूसरी सिंचाई का सही समय क्यों है अहम
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि गेहूं की दूसरी सिंचाई आमतौर पर बुवाई के 45 से 50 दिन बाद की जाती है. यह वह दौर होता है जब फसल में कल्ले निकलने शुरू होते हैं. अगर इस समय पोषण की कमी रह जाए, तो न सिर्फ पौधे कमजोर रह जाते हैं बल्कि बालियों की संख्या भी घट सकती है. ठंड और मौसम में बदलाव के कारण कई खेतों में नमी और तापमान का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पौधों की ग्रोथ रुकने लगती है. ऐसे में दूसरी सिंचाई के बाद उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है.
पीलापन क्यों आता है गेहूं में
गेहूं की पत्तियों में पीलापन अक्सर नाइट्रोजन या जिंक की कमी का संकेत होता है. कई किसान सिर्फ यूरिया पर ही निर्भर रहते हैं, जबकि जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी उतने ही जरूरी होते हैं. जिंक की कमी से जड़ें कमजोर रहती हैं और पौधा मिट्टी से पूरा पोषण नहीं ले पाता. इसका सीधा असर कल्लों की संख्या और फसल की मजबूती पर पड़ता है.
यूरिया और जिंक का सही कॉम्बिनेशन
दूसरी सिंचाई के 5 से 7 दिन बाद जब खेत में हल्की नमी रह जाए और पैर टिकने लगें, तब यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय प्रति एकड़ करीब 40 से 45 किलो यूरिया समान रूप से छिड़कना चाहिए. अगर बुवाई के समय जिंक नहीं दिया गया था, तो इसे यूरिया के साथ मिलाकर डालना फायदेमंद रहता है. यह कॉम्बिनेशन पत्तियों के पीलेपन को दूर करता है और पौधों को नई ऊर्जा देता है.
संतुलित पोषण से बढ़ेगी पैदावार
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन से गेहूं की जड़ें मजबूत होती हैं, कल्लों की संख्या तेजी से बढ़ती है और फसल एकसार दिखने लगती है. सही समय पर खाद देने से पौधा ठंड और अन्य तनाव को भी बेहतर तरीके से झेल पाता है. इसका नतीजा यह होता है कि बालियां भरपूर बनती हैं और दाना भी स्वस्थ रहता है.