पीएम फसल बीमा घोटाले में एक और गिरफ्तारी.. 1 लाख पॉलिसी हुईं रिजेक्ट, 40 करोड़ का फर्जीवाड़ा

महोबा में फसल बीमा योजना में घोटाला कर करोड़ों रुपये हड़पने वालों को पुलिस हिरासत में ले रही है. अब एक और आरोपी को पकड़ा गया है. जबकि, 34 लोगों को इस मामले में जेल भेजा गया है. महोबा के उपनिदेशक कृषि रामसजीवन ने बताया कि जांच में जिनके नाम सामने आ रहे हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई कराई जा रही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 7 Jan, 2026 | 05:25 PM

Crop insurance scam: बुंदेलखंड के महोबा समेत अन्य जिलों में बड़े पैमाने पर पीएम फसल बीमा योजना में घोटाला किया गया है. शासन को भेजी गई रिपोर्ट 40 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला दर्शाया गया है. महोबा समेत कई जिलों में जांच टीमें फर्जीवाड़े का खुलासा करने में जुटी हैं. ताजा घटनाक्रम में महोबा पुलिस ने घोटाले में शामिल होने के एक और आरोपी को पकड़ लिया है. अब तक 34 लोगों को पुलिस हिरासत में ले चुकी है. जबकि 24 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में फसल बीमा से जुड़ी 1 लाख से अधिक पॉलिसी फर्जीवाड़े के चलते रिजेक्ट कर दी गई हैं.

40 करोड़ के फसल बीमा घोटाले में एक और आरोपी को जेल भेजा

महोबा में फसल बीमा घोटाले का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाने वाले किसान नेता गुलाब सिंह ने बताया कि महोबा में नदियों, वन विभाग, चकमार्ग और ग्राम सभा की जमीन पर फसल दिखाकर करीब 40 करोड़ रुपये के फसल बीमा घोटाला किया गया है. उन्होंने कहा कि घोटाले में शामिल एक और आरोपित कमलेश राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है. वह अजनर क्षेत्र के ग्राम टिकरिया का रहने वाला है. कुलपहाड़ थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि उस पर अन्य वन विभाग के खाते में दर्ज भूमि पर फसल बीमा करा रुपये हड़पने का आरोप है. उसे गांव के पास से पकड़ा गया.

10 रुपये के स्टॉप पर बटाईनामा बनवाकर किए गए फर्जी बीमा

फसल बीमा में फर्जीवाड़ा करने आरोपित लोगों ने कंपनी से साठगांठ कर ऐसे गांवों को चुना, जहां चकबंदी प्रक्रिया चल रही है. चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों का डाटा आनलाइन दिखता नहीं है, जिससे कोई भी 10 रुपये के स्टांप पर बटाईनामा बनवाकर बीमा करा सकता है. इसमें वह जो जानकारी भर देता है वह सही मानी जाती है. इसकी जांच बीमा कंपनी ही करती है. इसके बाद व्यक्ति टोल फ्री नंबर पर फोन कर नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन कर देता है. इसी तरीके को अपनाकर पीएम फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़ा किया गया है.

बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक समेत 34 जेल भेजे गए

बिना सत्यापन लोगों को भुगतान करने से इफको टोकियो कंपनी के लोग भी शिकंजे में हैं. इस मामले में अब तक बीमा कंपनी इफको टोकियो के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी व महिला समेत 34 को पकड़ा गया है. जिला प्रबंधक ने हाई कोर्ट से जमानत करा ली थी. अब इस मामले पर मंगलवार को बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी की जमानत याचिका अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट-1 ध्रुव राय ने खारिज कर दी.

एक लाख से ज्यादा बीमा पॉलिसी रद्द

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कृषि विभाग की ओर से कराई गई जांच में अब तक खरीफ 2025 की 1,05,361 फसल बीमा पॉलिसी रद्द की जा चुकी हैं. पहले महोबा और झांसी में गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था, लेकिन अब ललितपुर और हमीरपुर जैसे जिलों में भी जांच शुरू कर दी गई है. जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनियां लगातार पॉलिसी रद्द कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है. महोबा के उपनिदेशक कृषि रामसजीवन ने बताया कि जांच में जिनके नाम सामने आ रहे हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई कराई जा रही है.

सरकारी और बंजर जमीन पर भी कराया गया बीमा

जांच में सामने आया है कि कई जगहों पर नदी, बंजर भूमि, रेलवे की जमीन, सरकारी जमीन और यहां तक कि सांसदों के नाम दर्ज भूमि पर भी फसल बीमा करा दिया गया. इन जमीनों पर खेती होना संभव ही नहीं है, इसके बावजूद कागजों में फसल दिखाकर करोड़ों रुपये का क्लेम ले लिया गया. अकेले महोबा जिले में करीब 40 करोड़ रुपये के गलत क्लेम की बात सामने आई है. इस मामले में कई थानों में FIR दर्ज की जा चुकी हैं और अब जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है.

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