नए साल की शुरुआत के साथ ही गेहूं की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है. गेहूं के दाम में बढ़ोत्तरी के साथ ही आटा, बिस्किट, ब्रेड के दामों में उछाल की आशंका बढ़ गई है. 1 जनवरी से 7 जनवरी तक गेहूं का दाम 5 फीसदी से अधिक चढ़ गया है. उत्तर प्रदेश में गेहूं के मंडी भाव और खुदरा भाव में बढ़ोत्तरी दी गई है. देश में सबसे ज्यादा गेहूं का भाव मुंबई बाजार में दर्ज किया गया है. वहीं, केंद्र की ओर से आगामी सीजन के लिए एमएसपी बढ़ाने के ऐलान के बाद रबी सीजन में गेहूं की बुवाई में भारी इजाफा दर्ज किया गया है.
नए साल में 5 फीसदी महंगा हो गया गेहूं
गेहूं की कीमत जगह, क्वालिटी और मार्केट के टाइप (थोक बनाम खुदरा) के आधार पर काफी अलग-अलग होती है. 7 जनवरी 2026 तक भारत में खुले बाजार में गेहूं की कीमतें लगभग 24 रुपये से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक हैं. हालांकि, उत्तर प्रदेश में औसत थोक बाजार यानी मंडी भाव लगभग 25.5 रुपये प्रति किलोग्राम, यानी 2550 रुपये प्रति क्विंटल है. भारत में सबसे अधिक गेहूं की कीमत मुंबई बाजार में 3950 रुपये प्रति क्विंटल यानी 39.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है.
40 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रहा ये गेहूं
केंद्र सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग साल के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इस हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश में गेहूं का औसत मंडी भाव एमएसपी से 5 फीसदी अधिक दर्ज किया गया है. हालांकि, यूपी के कई खुले बाजारों में खुदरा कीमतें 27 रुपये से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक हैं. इसमें ऑर्गेनिक या शरबती गेहूं जैसी खास किस्मों की कीमतें 40 रुपये से 90 रुपये प्रति किलो तक हैं.
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अधिक दाम के चलते रबी सीजन में गेहूं की रिकॉर्ड़तोड़ बुवाई
केंद्र सरकार ने अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी 2026-27 मार्केटिंग साल के लिए गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 प्रति क्विंटल तय किया है. यह कीमत कृषि उत्पादकों को खेती की कीमतों में भारी गिरावट से बचाने के लिए एक बेंचमार्क है. गेहूं का एमएसपी नए सीजन में बढ़कर मिलने के चलते किसानों ने इस बार जमकर गेहूं की बुवाई की है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार गेहूं की बुआई 312 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो बीते सीजन की तुलना में करीब 7 लाख हेक्टेयर अधिक है.
अन्य फसलों की भी जमकर बुवाई की गई
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि 2 जनवरी तक 634 लाख हेक्टेयर भूमि में रबी फसल की बुआई हो चुकी है. यह पिछले वर्ष की तुलना में 16 लाख हेक्टेयर अधिक है. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि 2 जनवरी तक 634 लाख हेक्टेयर भूमि में रबी फसल की बुआई हो चुकी है. यह पिछले वर्ष की तुलना में 16 लाख हेक्टेयर अधिक है. धान की रोपाई 42 लाख हेक्टेयर में हुई है. दलहन की बुआई 140 लाख हेक्टेयर में हुई है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 10 लाख हेक्टेयर अधिक है. श्रीअन्न और मोटे अनाज की बुआई 55 लाख हेक्टेयर और तिलहन की बुआई 86 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में की गई है.