अन्नदाता में आक्रोश, मंडी के बाहर फेंका 2500 किलो प्याज.. इस वजह से बढ़ी नाराजगी

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने नंदगांव मंडी समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसके निदेशक मंडल को भंग करने की मांग की है. संघ का कहना है कि मंडी समिति किसानों के लिए सबसे मुश्किल समय में पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई है. संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि नंदगांव APMC अब सिर्फ नाम की संस्था बनकर रह गई है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 May, 2026 | 12:00 PM

Onion Mandi Bhav: महाराष्ट्र के नासिक जिले में रेट में गिरावट से प्याज किसान आक्रोशित हैं. नंदगांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में एक किसान ने पूरे दिन इंतजार करने के बाद अपनी 2,500 किलो से ज्यादा प्याज मंडी के बाहर फेंक दिया, क्योंकि उसकी फसल की नीलामी नहीं हो पाई. इस घटना के बाद मंडी के बाहर किसानों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने प्रशासन और व्यापारियों के खिलाफ नारेबाजी की और मंडी समिति को भंग करने की मांग की. किसानों का आरोप था कि मंडी समिति ठीक से काम नहीं कर रही है.

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के सदस्य बलकृष्ण संगले ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि एक किसान अपना प्याज बेचने के लिए नंदगांव APMC लेकर आया था, लेकिन शाम तक उसकी फसल की नीलामी  नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि इंतजार से परेशान होकर किसान ने गुस्से में आकर 2,500 किलो से ज्यादा प्याज मंडी के बाहर फेंक दिया और प्रशासन व व्यापारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की.

प्याज का ताजा रेट

खास बात यह है कि यह विरोध महाराष्ट्र के कई बाजारों में प्याज की कीमतों में तेज गिरावट के बीच सामने आया है. दरअसल, महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का रेट 200 रुपये क्विंटल से भी नीचे गिर गया है. Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, अहमदनगर APMC में 11 मई को कुल 2,929.90 मीट्रिक टन प्याज की आवक दर्ज की गई. इस दिन न्यूनतम कीमत 150 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,100 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल कीमत 650 रुपये प्रति क्विंटल रही. वहीं अकलुज APMC में 10 मई को 63.10 मीट्रिक टन प्याज की आवक हुई. यहां इसकी न्यूनतम कीमत 200 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 900 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल कीमत लगभग 500 रुपये प्रति क्विंटल रही.

नंदगांव मंडी समिति पर लगे गंभीर आरोप

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने नंदगांव मंडी समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसके निदेशक मंडल को भंग करने की मांग की है. संघ का कहना है कि मंडी समिति किसानों के लिए सबसे मुश्किल समय में पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई है. संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि नंदगांव APMC अब सिर्फ नाम की संस्था बनकर रह गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि यहां कोई प्रशासनिक निगरानी नहीं है और किसान पूरी तरह से अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं. उनके अनुसार, मंडी में अव्यवस्था और लापरवाही बढ़ गई है, जबकि अधिकारी किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

APMC को भंग करना इस समस्या का समाधान नहीं

हालांकि, भारत दिघोले ने कहा कि सिर्फ APMC को भंग करना इस समस्या का समाधान नहीं होगा और इससे स्थिति और खराब हो सकती है. उन्होंने कहा कि मंडी समिति अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी- किसानों की फसलों की नीलामी को निभाने में पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने यह भी बताया कि कई किसान गुस्से में आकर APMC को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ऐसे समय में जब कीमतें पहले से ही बहुत नीचे हैं, मंडी को बंद करना संकट को और गहरा कर देगा. इसके बजाय उन्होंने APMC के पूरे निदेशक मंडल को हटाने और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की.

 

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Published: 13 May, 2026 | 11:55 AM
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