Stubble burning India: देश में हर साल फसल कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या एक बार फिर चर्चा में है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में पंजाब में पराली जलाने के कुछ नए मामले सामने आए हैं, लेकिन चिंता की सबसे बड़ी वजह मध्य प्रदेश बना हुआ है, जहां इस समस्या का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.
पंजाब में क्या है स्थिति?
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, रविवार को पंजाब में पराली जलाने के 4 नए मामले दर्ज किए गए. इसके साथ ही इस सीजन में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है. हालांकि यह संख्या अभी कम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सख्ती और जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है.
पंजाब लंबे समय से पराली जलाने के लिए चर्चा में रहा है, खासकर धान की कटाई के बाद. लेकिन इस बार गेहूं की कटाई के दौरान अभी तक मामलों की संख्या सीमित बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है.
मध्य प्रदेश क्यों बना सबसे बड़ा केंद्र?
इस बार पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश सबसे आगे निकल गया है. रविवार को देशभर में दर्ज 1,815 मामलों में से अकेले 1,058 मामले मध्य प्रदेश से सामने आए. इसके साथ ही इस सीजन में राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 18,376 हो गई है.
कुल आंकड़े क्या कहते हैं?
19 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार देशभर में पराली जलाने के कुल 25,976 मामले सामने आए हैं.
मध्य प्रदेश: 18,376
उत्तर प्रदेश: 7,547
हरियाणा: 36
पंजाब: 14
दिल्ली: 3
पिछले वर्षों के आंकड़े क्या कहते हैं?
CREAMS (Consortium for Research on Agroecosystem Monitoring and Modeling From Space) के डेटा के अनुसार, पिछले पांच सालों में भी मध्य प्रदेश इस मामले में लगातार आगे रहा है.
- 2022 से अब तक कुल 2,24,515 मामले दर्ज हुए
- इनमें से 1,13,062 मामले मध्य प्रदेश से थे (यानि 50 फीसदी से ज्यादा)
- उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 53,538 मामले दर्ज हुए
- पंजाब में 47,991
- हरियाणा में 9,805 मामले सामने आए
- दिल्ली में सबसे कम, सिर्फ 119 मामले दर्ज हुए
किन जिलों में स्थिति ज्यादा खराब?
इस सीजन में उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां 2,843 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में 100 से ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. यह दर्शाता है कि समस्या कुछ खास क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर है. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि पराली जलाने की समस्या अब केवल पंजाब और हरियाणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह देश के कई राज्यों में फैल चुकी है.
जिले स्तर पर भी गंभीर स्थिति
अगर जिलों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला इस सीजन में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है. यहां अब तक 2,843 पराली जलाने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. यह दिखाता है कि समस्या केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी यह तेजी से फैल रही है.
पिछले सीजन की तस्वीर
2025 के खरीफ सीजन में भी मध्य प्रदेश सबसे आगे था, जहां 17,067 मामले दर्ज किए गए थे. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 मामले सामने आए थे. इससे यह साफ होता है कि मध्य प्रदेश में पराली जलाने की समस्या लगातार बनी हुई है और हर सीजन में यह राज्य शीर्ष पर बना रहता है.
आखिर क्यों नहीं रुक रही समस्या?
पराली जलाने के पीछे कई कारण हैं. किसानों के पास समय की कमी, मशीनों की लागत और वैकल्पिक समाधान की कमी इसके प्रमुख कारण हैं. गेहूं और धान की फसल के बीच कम समय होने के कारण किसान जल्दी खेत साफ करने के लिए पराली जलाना आसान विकल्प मानते हैं. हालांकि सरकार और कई एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं और मशीनों पर सब्सिडी भी दी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर अभी सीमित नजर आता है.
आगे क्या है चुनौती?
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे फसल कटाई तेज होगी, पराली जलाने के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में जरूरी है कि राज्यों की सरकारें, स्थानीय प्रशासन और किसान मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें. पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि यह हवा की गुणवत्ता को भी खराब करता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है. इसलिए इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना समय की मांग बन गया है.