MSP तय करने के बावजूद किसानों को नुकसान, 4 रुपये किलो आलू बेचने को मजबूर हुए अन्नदाता

शुरुआती अनुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल में कुल उत्पादन लगभग 1.5 करोड़ टन था, लेकिन व्यापारी मानते हैं कि अप्रैल तक कटाई खत्म होने तक यह 1.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. उत्तरी बंगाल में भी उत्पादन अच्छा रहा. हालांकि, राज्य की घरेलू खपत केवल करीब 60 लाख टन है.

नोएडा | Updated On: 10 Mar, 2026 | 04:08 PM

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने के बावजूद राज्य के किसानों को उचित रेट नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. खासकर दक्षिण बंगाल के आलू किसानों को कुछ ज्यादा ही नुकसान हो रहा है, क्योंकि कई जिलों में इस बार आलू की अच्छी पैदावार हुई है. ऐसे में किसानों के लिए संकट पैदा हो गया है. कीमत में गिरावट का आलम यह है कि बांकुरा, बर्दवान और नदिया जिले के किसान लोकप्रिय ज्योति किस्म का आलू सिर्फ 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम में बेचने को मजबूर हैं, जबकि कोलकाता के रिटेल मार्केट में इसका दाम तीन से चार गुना अधिक है.

किसानों का कहना है कि खेत के बाहर कीमतों में तेज गिरावट आ रही है. ऐसे में वे मजबूरी में कटाई के बाद उपज जल्दी बेच रहे हैं, ताकि बचा हुआ स्टॉक सड़े नहीं. हालांकि, खेत में किसान भले ही मजबूरी में 4-5 रुपये किलो की दर से आलू बेच रहे हैं, लेकिन कोलकाता के रिटेल मार्केट  में आलू 14 से 19 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है. किसान और व्यापारी इस अंतर को आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद लंबे मध्यस्थ नेटवर्क को जिम्मेदार मान रहे हैं.

आलू किसानों को हो रहा नुकसान

हुगली जिले के सिंगुर के आलू किसान समीर मन्ना ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि 50 किलोग्राम वाले बैग की उत्पादन लागत लगभग 400 रुपये है, लेकिन अब हमें इसे सिर्फ 250 रुपये में बेचना पड़ रहा है. हम चिंतित हैं कि कोल्ड स्टोरेज  में पूरी फसल रखने के लिए जगह नहीं होगी, इसलिए किसान भारी नुकसान से बचने के लिए जल्दी बेच रहे हैं.

इस साल 1.7 करोड़ टन तक हो सकता है आलू का उत्पादन

इस साल मौसम के अनुकूल हालातों ने राज्य भर में आलू की पैदावार रिकॉर्ड  स्तर तक पहुंचा दी. शुरुआती अनुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल में कुल उत्पादन लगभग 1.5 करोड़ टन था, लेकिन व्यापारी मानते हैं कि अप्रैल तक कटाई खत्म होने तक यह 1.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. उत्तरी बंगाल में भी उत्पादन अच्छा रहा. हालांकि, राज्य की घरेलू खपत केवल करीब 60 लाख टन है, जिससे अधिक अधिशेष बच गया है, जिसे या तो स्टोर करना होगा, अन्य राज्यों में भेजना होगा या निर्यात करना होगा. ऐसे पश्चिम बंगाल में लगभग 580 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 75 लाख टन आलू रखा जा सकता है.

भारी फसल कृषि के लिए अच्छी खबर है

उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्टोरेज क्षमता की कमी के कारण बड़ी मात्रा बाजार में उतार-चढ़ाव या खराब होने के जोखिम में रह सकती है. कोलकाता के पोस्ता थोक बाजार के एक व्यापारी ने कहा कि भारी फसल कृषि के लिए अच्छी खबर है, लेकिन बाजार इतनी बड़ी मात्रा को तुरंत अवशोषित नहीं कर सकता. जब तक राज्यों के बीच बिक्री नहीं बढ़ती, दामों पर दबाव बना रहेगा.

बाजार में कीमतें करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गईं

पश्चिम बंगाल में आलू उद्योग अभी भी 2025 में हुए नुकसान से उबर रहा है. उस साल राज्य सरकार ने आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 900 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था, लेकिन खुले बाजार में कीमतें करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गईं, जिससे स्टोर किए गए स्टॉक पर लगभग 2,200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. राज्य के कृषि-मार्केटिंग मंत्री बेचाराम मन्ना ने किसानों से घबराने की जरूरत नहीं होने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार आलू को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेगी और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि, फरवरी महीने में पश्चिम बंगाल सरकार ने ऐलान किया था कि 9.50 रुपये किलो की दर से वह इस साल 12 लाख टन आलू की सरकारी खरीदी करेगी. उसे उम्मीद थी कि उसके इस फैसले से आलू के रिट में बढ़ोतरी होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

Published: 10 Mar, 2026 | 04:06 PM

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