1.9 करोड़ टन आलू उत्पादन की उम्मीद, कोल्ट स्टोरेज में 30 प्रतिशत जगह किसानों के लिए रहेगी आरक्षित

कृषि विभाग का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में इस बार आलू उत्पादन 1.7 से 1.9 करोड़ टन तक हो सकता है. आलू की कटाई फरवरी के तीसरे हफ्ते से शुरू हो गई है, और पीक सीजन मार्च के मध्य से अप्रैल की शुरुआत तक रहेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 17 Feb, 2026 | 01:34 PM

Potato Farmer: अधिक फसल उत्पादन होने पर किसान के साथ-साथ सरकार भी खुश होती है, क्योंकि गोदाम खाद्यान से भर जाते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं होने वाला है. कहा जा रहा है कि राज्य में इस साल आलू की बंपर उत्पादन तृणमूल कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनावों से पहले सिरदर्द बन सकता है. इस बार अनुकूल मौसम के कारण, बंगाल में आलू का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर होने की संभावना है. इससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को किसानों, उपभोक्ताओं और कोल्ड स्टोरेज मालिकों के हितों को संतुलित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने पड़ रहे हैं. वहीं, कहा जा रहा है कि इस बार प्रदेश में 1.9 करोड़ टन आलू उत्पादन की उम्मीद है. ऐसे में राज्य सरकार कोल्ड स्टोरेज में 30 प्रतिशत जगह मार्जिनल किसानों के लिए आरक्षित रखेगी.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के पंचायत मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कृषि सलाहकार प्रदीप मजूमदार ने कहा कि उन्होंने इस साल जैसा अनुकूल और अच्छा मौसम पहले कभी आलू की खेती के लिए नहीं देखा. उनका मानना है कि इस बार मौसम की स्थिति इतनी बेहतर रही है कि इससे आलू की फसल को काफी लाभ हुआ है. अगर कोई बड़ी समस्या नहीं हुई, तो बंगाल में आलू का उत्पादन अभूतपूर्व स्तर पर होगा. उन्होंने आगे कहा कि हमारी नीति किसानों के हितों को पहले रखने की है, इसलिए हमने पहले ही यह निर्णय लिया है कि राज्य के सभी कोल्ड स्टोरेज में 30 प्रतिशत जगह मार्जिनल किसानों के लिए आरक्षित रखी जाएगी, ताकि वे अपनी उपच को सस्ते रेट पर बेचने के लिए मजबूर न हों.

800000 किसान परिवार आलू की खेती से जुड़े हैं

कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी सरकार आलू के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो बंगाल के कई जिलों, खासकर हुगली, बांकुड़ा, पूर्वी बर्दवान और पश्चिमी मिदनापुर में लगभग 8,00,000 किसान परिवारों से जुड़ा हुआ है. हालांकि, जानकारों का ये भी कहना है कि इस बार आलू की अधिक आपूर्ति से कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है. इससे किसान सस्ते दरों पर आलू बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं. मुख्य चुनौती यह है कि किसानों को अच्छे दाम मिलें और वे किसी तरह के तनावपूर्ण बिक्री से बचें.  यानी कोल्ड स्टोरेज में 30 प्रतिशत जगह आरक्षित करने का कदम इसी कोशिश का हिस्सा है.

1.9 करोड़ टन आलू उत्पादन की है उम्मीद

बंगाल सामान्यत: 1.2 करोड़ टन आलू का उत्पादन करता है, जो लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि पर उगाया जाता है. इस साल कृषि विभाग का अनुमान है कि उत्पादन 1.7 से 1.9 करोड़ टन तक हो सकता है. आलू की कटाई फरवरी के तीसरे हफ्ते से शुरू हो गई है, और पीक सीजन मार्च के मध्य से अप्रैल की शुरुआत तक रहेगा. इस दौरान आलू की आपूर्ति अधिक होगी, जो चुनावी समय के साथ मेल खाती है और अगर कोई समस्या आई तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है.

 

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Published: 17 Feb, 2026 | 01:31 PM

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