Budget 2026: बजट में बीज बिल पर रोडमैप की घोषणा आज संभव, बीज नहीं उगने पर किसान को पैसा मिलेगा?

केंद्रीय वित्तमंत्री आज केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर खास जोर है. कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ ही किसानों की लागत घटाने के लिए उन्नत और कीट रोधी बीजों की उपलब्धता पर जोर है. बजट में बीज बिल को लेकर प्लान की घोषण संभावित है. बीज बिल को लेकर कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही सहमति दे चुके हैं.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 1 Feb, 2026 | 10:55 AM

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बजट पेश कर रही हैं. बजट में बीज बिल को लेकर प्लान जारी होने की संभावना को बल मिला है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कई मौकों पर बीज बिल लाने की बात कह चुके हैं. बीज विधेयक से किसानों को उन्नत और जलवायु अनुकूल बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी. कीट रोधी और बीमारियों से मुक्त बीज विकसित करने पर फंड खर्च होगा. इसके साथ ही जीएम फसलों और हाइब्रिड बीजों पर भी नए रिसर्च और शोध का रास्ता खुलेगा. जबकि, सबसे अहम बिंदु नकली, घटिया या मानक से विपरीत बीजों की बिक्री और निर्माण पर पूरी तरह रोक लगेगी.

1966 के पुराने कानून की जगह लेगा नया बीज कानून

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते सप्ताह प्रेसवार्ता में कहा कि बीज बिल पर मंत्रालय ने तैयारियां कर ली हैं. ऐसे में आज पेश हो रहे बजट में कृषि सेक्टर के विकास के लिए बीज संशोधन बिल यानी सीड़ एक्ट के रोडमैप की घोषणा की जा सकती है.  बीज विधेयक 2025 साल 1966 के पुराने बीज अधिनियम की जगह लेगा. पिछले कई दशकों में खेती, तकनीक और बीज उत्पादन के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन कानून उसी पुराने ढांचे पर चलता रहा.

बीज बिल के लिए 9 हजार सुझावों पर अमल

अब सरकार आधुनिक मानकों के हिसाब से नया कानून लाकर बीज सेक्टर को व्यवस्थित करना चाहती है. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को मिलने वाले बीज की गुणवत्ता भरोसेमंद हो और नकली या घटिया बीजों पर लगाम लगाई जा सके. कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी के अनुसार बीज विधेयक 2025 के मसौदे पर देशभर से करीब 9,000 सुझाव और आवेदन मिले हैं. इन सभी सुझावों की जांच की जा रही है और उन्हें शामिल करते हुए एक कैबिनेट नोट तैयार किया जाएगा. इसके बाद विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सुझाव मिलना यह दिखाता है कि किसान, बीज कंपनियां और कृषि विशेषज्ञ इस कानून को लेकर गंभीर और जागरूक हैं.

बीज क्वालिटी और निगरानी पर जोर

नए बीज विधेयक में बीजों की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है. इसका मतलब यह होगा कि किसी भी बीज किस्म, बीज उत्पादक और बीज विक्रेता को पंजीकरण कराना जरूरी होगा. बीज पैकेट पर क्यूआर कोड जैसे आधुनिक फीचर भी शामिल किए जाएंगे, ताकि किसान बीज की पूरी जानकारी आसानी से हासिल कर सकें. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि बीज कहां से आया है, किसने बनाया है और उसकी गुणवत्ता क्या है.

पारंपरिक बीजों को पहले की तरह इस्तेमाल कर पाएंगे किसान

सरकार ने यह भी साफ किया है कि नया कानून किसानों के अधिकारों को कमजोर नहीं करेगा. किसान अपने खेत में पैदा किए गए बीजों को बचा सकते हैं, इस्तेमाल कर सकते हैं और आपस में अदला-बदली भी कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें किसी तरह का पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी. सरकार का कहना है कि किसानों की इस पारंपरिक आजादी को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि वे बीज कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर न हो जाएं.

केंद्र और राज्य स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था

बीज विधेयक 2025 में केंद्र और राज्य स्तर पर बीज समितियों के गठन का भी प्रावधान है. ये समितियां बीजों की गुणवत्ता, पंजीकरण और बाजार में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगी. इससे बीजों से जुड़ी शिकायतों का समाधान जल्दी हो सकेगा और पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय होगी.

नियम तोड़ने पर सख्त सजा का प्रावधान

नए विधेयक में नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान रखा गया है. व्यक्तिगत मामलों में उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार 1 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में तीन साल तक की जेल भी हो सकती है. अगर कोई कंपनी नियम तोड़ती है, तो उस समय कंपनी का संचालन संभाल रहे जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

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