Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी. यह बजट बाजार, उद्योग और आम लोगों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें टैक्स बदलाव, सरकारी खर्च और आर्थिक दिशा के संकेत मिलते हैं. बजट के जरिए सरकार आने वाले साल के लिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, नागरिकों को सहारा देने और सरकारी वित्त प्रबंधन की रूपरेखा तय करती है. लेकिन इस बजट से किसानों को भी काफी उम्मीदें हैं. कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार इस बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan) की राशि में बढ़ोतरी कर सकती है. क्योंकि किसान कई सालों से राशि में इजाफे की मांग कर रहे हैं.
दरअसल, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को साल में छह हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलती है. यह रकम तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है. अब तक इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. किसानों को उम्मीद है कि बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण किसान सम्मान निधि की रकम बढ़ाने का ऐलान कर सकती हैं.
नई योजनाओं की घोषणा भी कर सकती है सरकार
वहीं, कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने और सिंचाई प्रणाली को आसान बनाने के लिए नई योजनाओं की घोषणा भी कर सकती है. खास बात यह है कि इस बजट से पशुपालकों और मछली पालकों को भी काफी उम्मीदें हैं. ऐसे में केंद्र सरकार पशुपालन और मछली पालन की योजनाओं में सब्सिडी राशि बढ़ा सकती है. खासकर यह बजट प्राकृतिक खेती पर फोकस रहेगा. क्योंकि पिछले बजट में सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये के फंड का आवंटन किया था.
जीडीपी में इसका योगदान 20 फीसदी से भी कम है
ऐसे में जानकारों का कहना है कि इस बार बजट से कृषि क्षेत्र को सिर्फ मामूली राहत नहीं, बल्कि बड़े और परिवर्तनकारी समर्थन की उम्मीद है. देश की करीब 45 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन जीडीपी में इसका योगदान 20 फीसदी से भी कम है. ऐसे में बजट 2026-27 में तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती और ग्रामीण आजीविका को जोड़कर खेती को नई दिशा देने की जरूरत बताई जा रही है.
किसान क्रेडिट कार्ड से भी काफी उम्मीदें
किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर भी अन्नदाताओं का इस बजट से काफी उम्मीदें हैं. किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों की जिंदगी को काफी हद तक आसान बना दिया है. इसके जरिए उन्हें कम ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का लोन आसानी से मिल जाता है, जिसका इस्तेमाल वे खेती से जुड़े खर्चों में कर सकते हैं. यह लोन साल में एक बार ब्याज सहित चुकाने के बाद फिर से लिया जा सकता है. शुरुआत में केसीसी की लिमिट एक लाख रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर तीन लाख कर दिया गया. हालांकि, लंबे समय से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, इसलिए किसान अब इसकी सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.