ओडिशा में धान खरीदी में देरी होने से किसान परेशान हैं. ऐसे किसान आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच बेरहामपुर की एक संस्था ने धान खरीद में कथित अवैध तरीकों के खिलाफ ओडिशा हाईकोर्ट का रुख किया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार द्वारा मंडियां तय करने और किसानों को टोकन देने के बावजूद उन्हें धान सीधे निजी मिलों तक ले जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. गंजाम, गजपति और रायगढ़ा जैसे जिलों में मिलें गांवों से 40- 50 किलोमीटर दूर हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त परिवहन खर्च उठाना पड़ रहा है. साथ ही, टोकन में तय मात्रा के अनुसार धान नहीं उठाया जा रहा और गुणवत्ता के नाम पर प्रति क्विंटल 5- 7 किलो की अवैध कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया गया है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में खाद्य आपूर्ति, कृषि और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित ओडिशा स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को पक्षकार बनाया गया है. इसमें जिला कलेक्टरों और सहकारी समितियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.
- गेहूं फसल: पूरी खेती गाइड, बुवाई से कटाई तक का प्रोसेस.. जानें हरेक राज्यों के लिए उन्नत किस्में
- Home Gardening: छत पर लगाएं आबारा का डाबरा गुलाब, कड़ाके की ठंड में भी खुशबू से महक उठेगा घर
- छोटे किसानों के लिए ATM है ये गाय, दूध में भैंस से भी ज्यादा फैट.. 5500 रुपये किलो बिकता है घी
- आलू किसानों को नुकसान, 11 रुपये किलो है लागत पर मार्केट में मिल रहा 7 रुपये तक का रेट
किसानों को प्रति क्विंटल 150 से 200 रुपये का नुकसान
साथ ही याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मिलर्स और सहकारी समिति के अधिकारी मजदूरी और पैकेजिंग के नाम पर किसानों से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल करीब 150 से 200 रुपये का नुकसान हो रहा है. संस्था ने हाईकोर्ट से मांग की है कि घोषित मंडियों को पूरी तरह चालू किया जाए, धान की खरीद टोकन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुसार बिना किसी कटौती के हो, सही तौल मशीनों का इस्तेमाल किया जाए और किसानों को परिवहन व जूट की बोरियों का खर्च वापस दिया जाए.
अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है
याचिका में कहा गया है कि सरकार परिवहन और जूट बैग का खर्च उठाती है, लेकिन किसानों को न तो मुफ्त बोरे दिए जा रहे हैं और न ही परिवहन खर्च की भरपाई हो रही है. देओगढ़ जिले में खराब तौल मशीनों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है, जिससे किसानों को और नुकसान हो रहा है. साथ ही, मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से खुले बाजार में कम दाम पर खरीद की अनुमति दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इससे किसानों को सरकार द्वारा तय MSP का लाभ नहीं मिल पा रहा है. किसानों ने जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है.