Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने से पहले भारत के आलू सेक्टर ने सरकार से समयबद्ध और ठोस नीतिगत फैसलों की मांग की है, ताकि इस क्षेत्र को किसानों की आय बढ़ाने, फूड प्रोसेसिंग को मजबूत करने और निर्यात आधारित विकास का बड़ा जरिया बनाया जा सके. उद्योग का कहना है कि अब छोटे-मोटे उपाय काफी नहीं हैं, बल्कि बड़े और संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है. आलू खाद्य सुरक्षा, किसानों की आमदनी और प्रोसेस्ड फूड उद्योग- तीनों के केंद्र में है. ऐसे में बजट 2026 में कोल्ड स्टोरेज में होने वाले नुकसान को कम करने, कटाई के बाद होने वाली बर्बादी रोकने और भारत को वैल्यू-एडेड आलू उत्पादों का ग्लोबल हब बनाने पर फोकस होना चाहिए.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, आलू उद्योग की कुछ प्रमुख और जरूरी मांगें हैं. पहली, किसानों की आय सुधारने के लिए सामूहिक खेती को बढ़ावा देना. प्रोसेसिंग ग्रेड आलू किसानों के लिए एफपीओ जैसे मॉडल पर टैक्स और वित्तीय प्रोत्साहन जरूरी हैं, जिससे बड़े स्तर पर उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और स्थिर आय सुनिश्चित हो सके. साथ ही दूसरी बड़ी जरूरत कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और प्रोसेसिंग से जुड़ी है. आधुनिक और ऊर्जा-कुशल कोल्ड स्टोरेज के लिए पूंजी सब्सिडी और सस्ती ब्याज दरों की मांग की गई है. साथ ही, परिवहन और लॉजिस्टिक्स पर सब्सिडी से लागत घटेगी. आलू प्रोसेसिंग को पीएलआई योजना में शामिल करने से नई क्षमता के निर्माण को भी रफ्तार मिलेगी.
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आलू की फसल गर्मी और पानी के तनाव से जल्दी प्रभावित होती है
तीसरी और अहम मांग डिजिटल तकनीक को तेजी से अपनाने की है. आलू की फसल गर्मी और पानी के तनाव से जल्दी प्रभावित होती है. इसी वजह से कंपनियां नई, जल्दी पकने वाली और जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित कर रही हैं और आईओटी सेंसर व एआई आधारित सलाह से किसानों को रियल-टाइम मदद दी जा रही है. उद्योग का मानना है कि अगर भारत को आलू उत्पादन में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है, तो प्रिसिजन फार्मिंग, ट्रेसेबिलिटी और डिजिटल एडवाइजरी को तेजी से अपनाना होगा.
आलू सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित न रहे
आलू उद्योग की एक और अहम मांग निर्यात को मजबूत करने को लेकर है. उद्योग का कहना है कि भारत का आलू सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि वैश्विक मानकों पर खरा उतरने वाला, टिकाऊ और निर्यात के लिए तैयार बने. इसके लिए सरकार की सक्रिय भूमिका जरूरी है. निर्यात के अनुकूल लॉजिस्टिक्स, अलग से पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, तेजी से फाइटो क्लियरेंस और द्विपक्षीय व्यापार में भारत की ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था को मान्यता मिलने से निर्यात को बड़ी मदद मिलेगी. इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और भारतीय उपमहाद्वीप के देशों में सरकार की अगुवाई में एक्सपोर्ट रोडशो आयोजित किए जाएं, तो भारतीय आलू को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान मिल सकती है.
बजट 2026 को एक निर्णायक मोड़ बनना चाहिए
भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) में निवेश भी बेहद जरूरी है. उद्योग लंबे समय से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए प्रोसेसिंग ग्रेड, ज्यादा उत्पादन देने वाली और जलवायु-अनुकूल आलू किस्मों पर बड़े स्तर पर शोध की मांग कर रहा है. बजट 2026 को एक निर्णायक मोड़ बनना चाहिए, जहां आलू को सिर्फ दामों पर निर्भर फसल से निकालकर हाई-वैल्यू और निर्यात आधारित ग्रोथ सेक्टर में बदला जाए. आरएंडडी, डिजिटल तकनीक और निर्यात में रणनीतिक निवेश से ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ेगा, निजी निवेश आएगा और किसानों की समृद्धि पर आधारित एक वैश्विक स्तर की आलू वैल्यू चेन तैयार हो सकेगी.