मालदा क्लीन प्लांट से सीड हब तक, कृषि में बड़े बदलाव की तैयारी में पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए मालदा क्लीन प्लांट, सीड हब, राइस-मक्का-ऑर्किड वैल्यू चेन और वैज्ञानिक कृषि रोडमैप पर काम होगा. शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं की जानकारी दी.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 14 Jul, 2026 | 11:40 PM

पश्चिम बंगाल में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े कदमों की घोषणा की है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलकाता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बताया कि राज्य में क्लीन प्लांट कार्यक्रम, सीड हब, फसल वैल्यू चेन, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि रोडमैप पर विशेष काम किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत का प्रमुख कृषि केंद्र बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं.

मालदा क्लीन प्लांट से बढ़ेगी फलोत्पादन की गुणवत्ता

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में शुरू किए जा रहे 9 क्लीन प्लांट सेंटर के नेटवर्क से पश्चिम बंगाल के मालदा जैसे फल उत्पादक क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा. मालदा क्लीन प्लांट/ग्रीन प्लांट सुविधा के माध्यम से आम, लीची और अन्य फलों के लिए रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाएंगे. इससे किसानों को बेहतर पौध सामग्री मिलेगी और निर्यात गुणवत्ता वाले फल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने बताया कि क्लीन प्लांट प्रोग्राम के तहत आधुनिक नर्सरी सिस्टम विकसित किया जा रहा है. इसके अंतर्गत बड़ी नर्सरी को 3 करोड़ रुपये और मध्यम नर्सरी को 1.5 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिससे हर साल बड़ी संख्या में क्लीन प्लांट किसानों तक पहुंच सकेंगे.

पश्चिम बंगाल बनेगा पूर्वी भारत का सीड हब

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पश्चिम बंगाल को आलू बीज, हाइब्रिड मक्का बीज और अन्य फसलों के बीज उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के साथ बीज उत्पादन को लेकर एमओयू किए गए हैं. इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे और राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा.

राइस, मक्का और ऑर्किड वैल्यू चेन पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल के राइस बाउल क्षेत्रों में पोषणयुक्त धान, मक्का बीज उत्पादन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जुड़े प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं. उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, प्रोसेसिंग सुविधाएं और अधिक मूल्य दिलाना जरूरी है.
इसके साथ ही ऑर्किड और अन्य बागवानी फसलों के लिए भी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इससे विशेष जलवायु वाले क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा.

वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार होगा

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के सहयोग से पश्चिम बंगाल के लिए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है. इसमें मिट्टी, पानी, जलवायु और स्थानीय संसाधनों के आधार पर तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल और किस तकनीक के साथ बेहतर उत्पादन दे सकती है.
उन्होंने कहा कि चावल अनुसंधान केंद्रों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है, जिससे धान, आलू और मक्का उत्पादन में रिसर्च आधारित मॉडल तैयार हो सके.

फसल बीमा और KCC से किसानों को सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पश्चिम बंगाल के किसानों को बड़े स्तर पर जोड़ा जाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके.
उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड अभी तक सीमित किसानों तक पहुंचा है. इसलिए नाबार्ड और बैंकों के सहयोग से गांव-गांव कैंप लगाकर अधिक किसानों को KCC उपलब्ध कराया जाएगा.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, डिजिटल एग्रीटेक और पोषण संवर्धन जैसे कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं.

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Published: 14 Jul, 2026 | 11:37 PM

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