राजभवन में मिला सम्मान.. खेत से स्कूलों की थाली तक पहुंची जैविक हल्दी, ऐसे हो रही 5 लाख की कमाई

Success Story: उत्तर प्रदेश के एक किसान ने हल्दी की खेती को नई पहचान दी है. 5 एकड़ में प्राकृतिक तरीके से खेती कर वह हल्दी पाउडर, पत्ती का तेल, गुड़ और सिरका जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं. मूल्य संवर्धन से उनकी आय बढ़ी और अब वह दूसरे किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 14 Jul, 2026 | 05:23 PM

Farmer Success Story: कभी खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित मानने वाले किसानों के बीच अब नई सोच देखने को मिल रही है. किसान अब अपनी उपज की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग कर कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने लगे हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी एक प्रगतिशील किसान की है, जिन्होंने हल्दी की खेती को अपनी आय का मजबूत जरिया बनाया है. उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र कुमार त्यागी ने हल्दी की खेती को सिर्फ फसल नहीं, बल्कि एक सफल कृषि व्यवसाय में बदल दिया है. वर्ष 2004 में शुरू हुई उनकी हल्दी खेती आज 5 एकड़ तक पहुंच चुकी है, जहां वह जैविक और प्राकृतिक तरीके से उत्पादन कर रहे हैं. उनकी इस उपलब्धि के लिए 7 फरवरी 2025 को लखनऊ राजभवन में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा सम्मानित किया गया. उनकी जैविक हल्दी की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक स्कूलों में मिड-डे मील के लिए इसकी आपूर्ति की जा रही है.

गन्ने के साथ शुरू की सह-फसली खेती

सुरेंद्र कुमार त्यागी (Surendra Kumar Tyagi) ने शुरुआत में हल्दी की खेती  गन्ने के साथ सह-फसल के रूप में शुरू की थी. उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में उन्होंने खेती की तकनीक को समझने के लिए प्रशिक्षण लिया और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में काम आगे बढ़ाया. धीरे-धीरे उन्होंने हल्दी की खेती का विस्तार किया और वर्तमान में करीब 5 एकड़ में हल्दी की खेती कर रहे हैं. उनकी खासियत यह है कि वह केवल हल्दी बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फसल को बाजार तक पहुंचाने से पहले उसकी प्रोसेसिंग भी करते हैं. हल्दी से वह उच्च गुणवत्ता वाला पाउडर तैयार करते हैं, वहीं गन्ने से गुड़, शक्कर और सिरका जैसे उत्पाद बनाकर बेचते हैं. इससे उन्हें सामान्य खेती की तुलना में बेहतर आमदनी मिल रही है.

बिना खाद और कीटनाशक के कर रहे प्राकृतिक खेती

सुरेंद्र कुमार त्यागी बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2015 से पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक खेती  को अपनाया. उनका मानना है कि स्वस्थ मिट्टी से ही अच्छी और पोषणयुक्त फसल पैदा हो सकती है. इसलिए वह हल्दी की खेती में किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते. उनके अनुसार, हल्दी ऐसी फसल है जिसमें पशुओं से नुकसान का खतरा बहुत कम रहता है और सामान्य तौर पर इसमें रोग भी कम लगते हैं. यही कारण है कि किसान कम जोखिम के साथ इसकी खेती कर सकते हैं. वह गौ-आधारित प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर देते हैं.

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जैविक हल्दी खेती के लिए राजभवन सम्मान.

हल्दी पत्तियों से बना रहे खास तेल

हल्दी की खेती से जुड़ा उनका सबसे खास प्रयोग हल्दी पत्ती का तेल तैयार करना है. उन्होंने बताया कि दिसंबर महीने में जब हल्दी के पत्ते पीले होकर सूखने लगते हैं, तब उनसे तेल निकाला जाता है. इस तेल को उन्होंने Turmeric Leaf Oil नाम दिया है. किसान के अनुसार, इस तेल का उपयोग शरीर के दर्द, मांसपेशियों की परेशानी, घुटने, कंधे और कमर दर्द जैसी समस्याओं में किया जाता है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि यह तेल मच्छर और दीमक नियंत्रण  में भी उपयोगी साबित हो रहा है.

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जैविक हल्दी खेती, नए उत्पाद और किसान की प्रेरणादायक सफलता कहानी.

5 एकड़ में 3 से 5 लाख रुपये तक मुनाफे का लक्ष्य

सुरेंद्र कुमार त्यागी के अनुसार, हल्दी की खेती में एक एकड़ पर बीज, मजदूरी, गुड़ाई और कटाई समेत करीब डेढ़ से 2 लाख रुपये तक लागत आ सकती है. वहीं सही प्रबंधन और मूल्य संवर्धन के साथ किसान 3 से 5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं. वह किसानों को सलाह देते हैं कि केवल उत्पादन तक सीमित  रहने के बजाय फसल की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए. उनका कहना है कि जब किसान खुद उद्यमी बनेगा, तभी उसकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. सुरेंद्र कुमार त्यागी वर्तमान में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के तहत किसान प्रशिक्षण से भी जुड़े हैं और अन्य किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती और कृषि उद्यमिता के जरिए किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.

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Published: 14 Jul, 2026 | 04:38 PM

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