बिहार में लंपी स्किन डिजीज को लेकर अलर्ट, पशुपालकों को सरकार ने जारी की जरूरी सलाह

बिहार में लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर है. सरकार ने पशुपालकों को संक्रमित पशुओं को अलग रखने और साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी है. यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और पशुओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. विभाग लगातार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 May, 2026 | 07:30 PM

Lumpy Skin Disease: बिहार में पशुओं में फैलने वाली खतरनाक बीमारी लंपी स्किन डिजीज (LSD) को लेकर सरकार सतर्क हो गई है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने साफ कहा है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह बीमारी तेजी से दूसरे पशुओं में फैल सकती है. खासतौर पर गाय और भैंसों में यह संक्रमण बड़ी परेशानी बन सकता है. सरकार ने पशुपालकों से संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने और पशु बाड़ों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की है.

क्या है लंपी स्किन डिजीज और क्यों बढ़ रही चिंता?

लंपी स्किन डिजीज  यानी LSD एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे पशुओं में फैलती है. इस बीमारी में पशुओं के शरीर पर गांठें और सूजन दिखाई देने लगती है. कई पशुओं को तेज बुखार, कमजोरी और खाने-पीने में दिक्कत भी होने लगती है. विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी संक्रमित पशुओं के संपर्क और कीड़े-मकोड़ों के जरिए तेजी से फैल सकती है. अगर एक पशु संक्रमित हो जाए और उसे अलग न रखा जाए, तो पूरा पशुबाड़ा इसकी चपेट में आ सकता है. बिहार सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए पशुपालकों को पहले से ही सतर्क रहने की सलाह दी है ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने की सलाह

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने साफ कहा है कि अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए. सरकार के अनुसार संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं के संपर्क में आने से रोकना बेहद जरूरी है. इसके लिए अलग बाड़ा या पृथक क्षेत्र बनाने की सलाह दी गई है. अगर समय रहते संक्रमित पशु को अलग नहीं किया गया, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है और कई पशु बीमार हो सकते हैं. इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. विभाग ने यह भी कहा है कि बीमारी दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि सही इलाज समय पर शुरू किया जा सके.

साफ-सफाई और कीड़े-मकोड़ों से बचाव पर जोर

सरकार ने पशु बाड़ों की नियमित साफ-सफाई  को सबसे जरूरी बचाव उपाय बताया है. विभाग के अनुसार गंदगी और नमी वाले स्थानों पर कीड़े-मकोड़े तेजी से बढ़ते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है. पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशुओं के रहने की जगह को रोज साफ करें और समय-समय पर दवा का छिड़काव करें. मक्खी, मच्छर और दूसरे कीटों से बचाव के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साफ-सफाई का सही ध्यान रखा जाए और कीट नियंत्रण किया जाए, तो इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

सरकार ने जारी किए जागरूकता अभियान और निर्देश

बिहार सरकार अब गांव-गांव में पशुपालकों को जागरूक करने की तैयारी  कर रही है. पशुपालन विभाग की टीमें लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और जरूरी सावधानियों की जानकारी दे रही हैं. विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और बीमारी से जुड़े हर मामले की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें. सरकार का कहना है कि समय पर जानकारी मिलने से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है. पशुपालकों को यह भी सलाह दी गई है कि पशुओं के खाने-पीने और साफ पानी का खास ध्यान रखें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे. फिलहाल बिहार में सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि लंपी स्किन डिजीज का असर ज्यादा न बढ़ सके.

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Published: 8 May, 2026 | 07:30 PM
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