पशुपालकों के लिए एडवाइजरी, गर्मी में इस तरह करें मवेशियों की देखरेख.. रोज दें 50 ग्राम मिनरल सप्लीमेंट

बढ़ती गर्मी और लू से पशुओं के स्वास्थ्य व दूध उत्पादन पर असर पड़ता है. पशुपालन विभाग ने साफ पानी, संतुलित आहार, ठंडे शेड और सही समय पर चराई की सलाह दी है. उचित देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और किसानों की आय में सुधार संभव है.

Kisan India
नोएडा | Published: 3 Apr, 2026 | 01:21 PM

Animal Husbandry: बदलते मौसम का असर फसल के साथ-साथ पशुओं के हेल्थ पर भी दिखने लगा है. ऐसे पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. आंध्र प्रदेश पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. टी दामोदर नायडू ने गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल करने के लिए पशुपालकों को खास सलाह दी है. एडवाइजरी में उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान और लू से पशुओं के हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है. उनकी तबीयत बीगड़ सकती है. इससे दूध उत्पादन पर असर पड़ेगा. इसलिए किसानों को इस मौसम में पशुओं के आहार में बदलान करने की जरूरत है.

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मौसम के अनुसार दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करें, ताकि पशुओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और उनकी उत्पादकता बढ़ सके. डॉ. नायडू ने कहा है कि बढ़ता तापमान, लू और गर्म हवाएं  पशुओं पर बुरा असर डाल सकती हैं. हालांकि, अगर विभाग की सलाह को सही तरीके से अपनाया जाए तो पशुओं की वृद्धि दर बेहतर हो सकती है और किसानों की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है.

30 से 50 ग्राम मिनरल सप्लीमेंट देना चाहिए

ताजा दिशानिर्देशों में उन्होंने फील्ड स्टाफ को निर्देश दिया है कि वे किसानों से लगातार संपर्क में रहें और बेहतर तरीकों को अपनाने में उनकी मदद करें. किसानों को सलाह दी गई है कि वे पशुओं को पूरे दिन साफ पानी उपलब्ध कराएं और जरूरत पड़ने पर सामुदायिक पानी की टंकियां भी बनाएं. चारे को काटकर ठंडे समय में खिलाना चाहिए और पाचन व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए 30 से 50 ग्राम मिनरल सप्लीमेंट देना चाहिए. साथ ही, पशुओं को केवल सुबह और शाम के समय ही चरने के लिए ले जाएं और दिन में उन्हें ठंडे व हवादार शेड में रखें.

दूध निकालने से पशुओं पर तनाव कम होता है

डॉ. नायडू ने कहा कि सुबह जल्दी दूध निकालने से पशुओं पर तनाव कम होता है और दूध उत्पादन  बढ़ता है. पशु शेड को पूर्व-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए और उसकी छत पर पानी का छिड़काव करना चाहिए. खासतौर पर क्रॉसब्रीड पशुओं के लिए पंखे और स्प्रिंकलर की व्यवस्था करना भी जरूरी है, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके. उन्होंने कहा है कि गर्मी के कारण पशुओं में तेज सांस लेना, ज्यादा लार गिरना और भूख कम लगना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे में किसानों को तुरंत पशुओं को ठंडा करने की व्यवस्था करनी चाहिए और पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. पशुओं को ले जाने-लाने का काम भी केवल ठंडे समय में करें और हर छह घंटे में उन्हें चारा देना जरूरी है.

गौशाला में करें इस तरह का प्रबंधन

निदेशक ने कहा कि गर्मी के मौसम में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं और नियमित रूप से किसानों के पास जाकर हालात की जानकारी ली जाए, ताकि पहले से तैयारी की जा सके. आपात स्थिति में मोबाइल वेटरनरी सेवाओं का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है. शेड के आसपास गीले बोरे टांगने  से ठंडक बनी रहती है, इसलिए ऐसा करने को भी कहा गया है. इसके अलावा, ग्रामीण जल आपूर्ति एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम करने से इन उपायों को और प्रभावी बनाया जा सकता है.

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