महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले दर्शाते हैं कि किसानों की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है. किसानों की आत्महत्या के पीछे की वजहें भारी कर्ज का बोझ, फसल बर्बादी और सरकारी मदद पाने के लिए बार बार अनदेखी को बताया जा रहा है. ताजा जारी की गई सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मराठवाड़ा रीजन में 2026 के 6 महीनों में 465 किसानों ने आत्महत्या की है. वहीं, साल 2025 में आठ जिलों वाले इस इलाके में प्रशासन के पास किसानों की आत्महत्या के 1,131 मामले दर्ज किए गए थे. रिपोर्ट के सामने आते ही हड़कंप मच गया है.
मराठवाड़ा इलाके में 465 किसानों ने आत्महत्या की
छत्रपति संभाजीनगर स्थित डिविजनल कमिश्नर कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा साल में जनवरी से जून के बीच मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के 465 मामले दर्ज किए गए. पीटीआई के अनुसार सरकारी रिपोर्ट में बुधवार को बताया गया कि मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में जनवरी से जून 2026 के बीच 465 किसानों ने आत्महत्या की.
सबसे ज्यादा 109 आत्महत्या के मामले संभाजीनगर में
सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा 109 आत्महत्या के मामले छत्रपति संभाजीनगर जिले से सामने आए हैं. जबकि सबसे कम मामले लातूर जिले (26) में सामने आए. रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जनवरी से जून के बीच जिलेवार किसानों की आत्महत्या के मामलों में बीड में 95 किसानों ने आत्महत्या की. धाराशिव जिले में 65, नांदेड़ जिले में 61, जालना में 40, परभणी में 34 और हिंगोली में 35 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं.
सरकारी मदद के लिए मामलों की जांच जारी
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या के 215 मामलों को सरकार से आर्थिक मदद के लिए योग्य पाया गया, जबकि 26 मामलों को मुआवजे के लिए अयोग्य पाया गया. फिलहाल 222 मामलों की जांच चल रही है और अब तक 108 मामलों में आर्थिक मदद दी जा चुकी है.
2024 से 2026 तक किसानों की आत्महत्या के मामले भयावह
विधान परिषद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 2024 में किसानों की आत्महत्या के 2,635 मामले दर्ज किए गए. महाराष्ट्र में 2025 के शुरुआती नौ महीनों में 781 किसानों ने आत्महत्या की. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में जनवरी और मई 2026 के बीच अकेले यवतमाल जिले में 102 किसानों ने आत्महत्या की है. जबकि, पूरे राज्य का आंकड़ा अभी जारी होना बाकी है.
किसानों की आत्महत्या की घटनाएं क्यों हो रहीं
महाराष्ट्र के किसान भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. वहीं, कर्ज लेकर खेती करने और फिर विपरीत मौसम से बर्बाद होने पर किसानों को सरकारी मदद समय पर नहीं मिल पाने और बार बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उनकी अनदेखी किए जाने से उनमें निराशा बढ़ती है. विपक्षी नेताओं ने विधासनभा परिसर में कर्जमाफी को लेकर किए प्रदर्शन में कहा था कि राज्य के किसान अभी भी कर्ज, घटती जमीन की जोत और जलवायु संबंधी झटकों के कारण गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं. विपक्ष ने कहा कि यह दुखद कृषि संकट मुख्य रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में अधिक है, जो बढ़ते कर्ज और फसल खराब होने की वजह से और गहरा गया. सरकार के ढुलमुल रवैये और किसान विरोधी नीतियों के चलते अन्नदाता आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होते हैं.