यूपी में नेचुरल फार्मिंग मिशन शुरू, 10 हजार हेक्टेयर में किसानों ने की खेती.. कृषि सखी दे रहीं ट्रेनिंग

प्राकृतिक खेती से महिलाओं को भी जोड़ा गया है, जिसमें फिलहाल उन्हें कृषि सखी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो किसानों को नेचुरल खाद और कीटनाशक बनाना सिखा रहीं हैं.

नोएडा | Updated On: 31 Aug, 2025 | 01:58 PM

खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ ही नेचुरल कृषि उत्पादों का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग को लॉन्च किया है और इसे राज्यों में लागू किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश में भी राज्य सरकार ने क्लस्टर बनाकर मिशन के जरिए खेती कराने की शुरुआत की है. पहले चरण में राज्य के एटा जिले के किसानों ने नेचुरल तरीके से खेती करने की शुरुआत कर दी है. किसानों को कृषि सखियां खेती की ट्रेनिंग दे रही हैं.

हर जिले में क्लस्टर बनाकर नेचुरल फार्मिंग करेंगे किसान

रसायनों से मिट्टी को बचाने और खेती को प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए यूपी के जिलों केंद्र सरकार का नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग पहली बार लागू किया जा रहा है. हर जिले में क्लस्टर बनाकर नेचुरल तरीके से खेती कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इसी कड़ी में एटा जिले में 21 क्लस्टर बनाकर नेचुरल फार्मिंग मिशन को पहली बार लागू कर दिया गया है. जबकि, अन्य जिलों में भी क्लस्टर बनाए जा रहे हैं.

एटा में 10 हजार हेक्टेयर नेचुरल फार्मिंग शउरू

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत एटा में 21 क्लस्टर बनाए गए हैं. हर क्लस्टर में 50 हेक्टेयर भूमि और 125 किसानों को शामिल किया गया है. यानी कुल मिलाकर 1050 हेक्टेयर पर प्राकृतिक खेती हो रही है, जिसमें 2650 किसान जुड़ चुके हैं. इन किसानों को प्राकृतिक तरीके से खेती करने की ट्रेनिंग दी जा रही है और जरूरत वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.

कृषि सखी बनी महिलाएं दे रहीं किसानों को ट्रेनिंग

प्राकृतिक खेती से महिलाओं को भी जोड़ा गया है, जिसमें फिलहाल उन्हें कृषि सखी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो किसानों को नेचुरल खाद और कीटनाशक बनाना सिखा रहीं हैं. कृषि सखियों को कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण भी दिया गया है इसके एवज में हर कृषि सखी को 5 हज़ार रुपये मासिक मानदेय भी दिया जा रहा है. ये कदम महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव ला रहा है.

बिना केमिकल या खाद के फसल तैयार हो रही

नेचुरल फार्मिंग यानी प्राकृतिक खेती का मतलब है कि बिना किसी केमिकल और उर्वरक के फसल को तैयार किया जाना इसमें सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों का ही उपयोग होता है, जैसे खाद की जगह घन जीवामृत और उसी तरह से फसलों को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए भी दशपर्णी अर्क का छिड़काव करके बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से फसले तैयार की जाती हैं, इनमें फल, सब्जियां, तिलहन और दलहन के अलावा मोटे अनाज की फसलें भी शामिल हैं. इनसे न सिर्फ फसलों पर खर्च कम आता है बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी रोका जा सकता है. इसे जीरो बजट खेती के नाम से भी जाना जाता है.

Published: 31 Aug, 2025 | 01:56 PM