प्रयागराज के किसानों की पहुंच अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक, इन देशों को कर रहे चावल और सब्जी निर्यात.. करोड़ों में कमाई

वित्त वर्ष 2025- 26 में कुल कृषि निर्यात 19,683.71 मीट्रिक टन रहा, जिसकी कीमत लगभग 79.95 करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा चावल का है. चावल का बड़ा हिस्सा नेपाल को निर्यात किया गया, जबकि मूंगफली दूसरे स्थान पर रही, जिससे करीब 2.96 करोड़ रुपये का निर्यात बांग्लादेश को हुआ.

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नोएडा | Updated On: 12 Apr, 2026 | 01:09 PM

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मंडल के किसान अब खेती के साथ-साथ बड़े स्तर पर व्यापार भी कर रहे हैं. इनकी पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो गई है. ये किसान अब स्थानीय मंडी में अपनी उपज नहीं बेच रहे, बल्कि सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों निर्यात कर रहे हैं. इससे इन किसानों की कमाई कई गुना बढ़ गई है. अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष 2025- 26 में यहां से रिकॉर्ड निर्यात हुआ है. आने वाले वर्षों में निर्यात को और बढ़ाने की योजना है.

सहायक कृषि विपणन अधिकारी दिनेश चंद्र ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को कहा कि वित्त वर्ष 2025- 26 में प्रयागराज से 19,172.9 मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया, जिससे करीब 75.77 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई. इसके अलावा आंवला, भिंडी, हरी मिर्च, मूंगफली  और नॉन-बासमती चावल का भी निर्यात किया गया है. अधिकारी ने कहा कि प्रयागराज मंडल में चावल सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा है.

2025- 26 में कुल कृषि निर्यात 19,683.71 मीट्रिक टन रहा

वित्त वर्ष 2025- 26 में कुल कृषि निर्यात 19,683.71 मीट्रिक टन रहा, जिसकी कीमत लगभग 79.95 करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा चावल का है. चावल का बड़ा हिस्सा नेपाल को निर्यात किया गया, जबकि मूंगफली दूसरे स्थान पर रही, जिससे करीब 2.96 करोड़ रुपये का निर्यात बांग्लादेश को हुआ.

प्रयागराज में औसत उत्पादन करीब 61.91 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के गंगा क्षेत्र का एक प्रमुख धान उत्पादक जिला है, जहां पारंपरिक और उन्नत दोनों तरह की खेती होती है. सोरांव (गंगा पार) और जसरा (यमुना पार) जैसे इलाकों में धान की खेती ज्यादा होती है, जहां औसत उत्पादन करीब 61.91 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. यह क्षेत्र खास किस्मों के धान उत्पादन  के लिए भी जाना जाता है. प्रयागराज क्षेत्र के किसानों ने अब कनाडा, यूके, दुबई और बांग्लादेश जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बना ली है, जिससे कृषि व्यापार के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अधिकारियों के अनुसार मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजराइल से जुड़े तनाव के बावजूद यहां से निर्यात पर ज्यादा असर नहीं पड़ा.

मार्च 2026 में ही इस क्षेत्र से 843 मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत करीब 3.26 करोड़ रुपये रही. इसमें आंवला से बने उत्पाद भी शामिल थे, जिन्हें दुबई और कनाडा भेजा गया. अधिकारियों का कहना है कि किसानों में बढ़ती जागरूकता और बेहतर बाजार संपर्क के कारण निर्यात बढ़ा है, जिससे किसानों की आय बढ़ने और स्थानीय खेती के वैश्विक बाजार से जुड़ने में मदद मिल रही है.

प्रयागराज में किसान कर रहे जैविक खेती

ऐसे प्रयागराज जिले में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब किसान धीरे-धीरे रासायनिक खेती छोड़कर जैविक और प्राकृतिक  खेती की ओर बढ़ रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, यहां 11,136 किसान जैविक खेती अपना चुके हैं. यह बदलाव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की सोच में भी बदलाव दिखाता है, जहां वे अब जमीन की सेहत और कम लागत वाली खेती को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.

5 किलोमीटर के दायरे में 411 क्लस्टर बनाए गए

प्रयागराज में जैविक खेती का बड़ा केंद्र गंगा नदी के आसपास के इलाके बनते जा रहे हैं. यहां करीब 5 किलोमीटर के दायरे में 411 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनमें लगभग 8,220 एकड़ जमीन पर जैविक खेती हो रही है. इन क्लस्टरों के जरिए किसानों को समूह में जोड़कर प्राकृतिक खेती के तरीके सिखाए जा रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और खेती का खर्च भी कम हो रहा है.

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Published: 12 Apr, 2026 | 01:08 PM
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