Indian mangoes: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता सिर्फ देश तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देशों में भारतीय आमों की मिठास और स्वाद के दीवाने मौजूद हैं. हाल ही में जापान ने भारत की कुछ प्रीमियम आम किस्मों के आयात पर रोक लगा दी थी, लेकिन इसका असर भारतीय आमों की वैश्विक मांग पर दिखाई नहीं दिया. उल्टा सिंगापुर में इन आमों की मांग इतनी बढ़ गई है कि सुपरमार्केट की शेल्फ तेजी से खाली हो रही हैं.
भारतीय आमों को लेकर विदेशों में बढ़ता आकर्षण एक बार फिर साबित करता है कि स्वाद और गुणवत्ता के मामले में भारत का कोई मुकाबला नहीं है.
जापान की रोक के बाद भी बनी रही मांग
कुछ समय पहले जापान के प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में कुछ तकनीकी कमियां बताई थीं. इसके बाद जापान ने भारत से आने वाली कुछ प्रीमियम आम किस्मों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी थी.
इस फैसले से आम निर्यातकों को शुरुआती चिंता जरूर हुई, लेकिन जल्द ही स्थिति बदल गई. जिन आमों को जापान ने स्वीकार नहीं किया, उन्हें दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलने लगी. खासकर सिंगापुर में भारतीय आमों की मांग अचानक बढ़ गई.
सिंगापुर में भारतीय आमों का क्रेज
भारत में सिंगापुर उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारतीय आमों के प्रति वहां लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है. सिंगापुर के सुपरमार्केट में भारतीय आम पहुंचते ही तेजी से बिक रहे हैं. ग्राहक खास तौर पर भारत की प्रसिद्ध आम किस्मों को पसंद कर रहे हैं. कई दुकानों में स्थिति यह है कि आमों की खेप आने के कुछ ही समय बाद स्टॉक खत्म हो जाता है. भारतीय आमों की गुणवत्ता, मिठास और खुशबू विदेशी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही है.
Guys, #indianmango fever has landed in Singapore. Mangoes from all states of India are flying off the shelves. Thanks to @protosphinx for sharing the story with us. HC Wong#mango #mangoexport @AgriGoI #fruit pic.twitter.com/vQWkjR5jN4
— Singapore in India (@SGinIndia) May 25, 2026
इन किस्मों की सबसे ज्यादा मांग
जापान द्वारा जिन आमों के आयात पर रोक लगाई गई थी, उनमें भारत की कई मशहूर और प्रीमियम किस्में शामिल थीं. इनमें अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे आम प्रमुख हैं. अल्फांसो को दुनिया के सबसे स्वादिष्ट आमों में गिना जाता है. वहीं गुजरात का केसर आम अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है. उत्तर भारत का लंगड़ा और दक्षिण भारत का बंगनपल्ली भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी लोकप्रिय हैं. इनके अलावा तोतापुरी, नीलम, सिंदूरा और मल्लिका जैसी किस्में भी विदेशी बाजारों में अच्छी मांग रखती हैं.
दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है भारत
भारत केवल आम उत्पादन में ही नहीं, बल्कि आम की विविध किस्मों के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 228.37 लाख मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, जो दुनिया में सबसे अधिक है. देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है. उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल हैं. इन राज्यों से न सिर्फ घरेलू बाजार बल्कि विदेशों में भी बड़ी मात्रा में आम भेजे जाते हैं.
कई देशों में बढ़ रहा भारतीय आम का निर्यात
भारतीय आमों की मांग केवल सिंगापुर तक सीमित नहीं है. संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, कुवैत, कतर और कई अन्य देशों में भी भारतीय आमों की अच्छी खपत है. निर्यात से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत ने केवल यूएई को ही 12,897 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए थे, जिनकी कीमत करीब 20 मिलियन डॉलर रही. यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की मजबूत पहचान बनी हुई है.
किसानों और निर्यातकों के लिए अच्छी खबर
सिंगापुर समेत अन्य देशों में बढ़ती मांग भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए सकारात्मक संकेत है. इससे आम उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है. साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुल रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाए तो भारतीय आम दुनिया के और अधिक बाजारों में अपनी पहुंच बना सकते हैं. जापान की रोक के बावजूद जिस तरह सिंगापुर में भारतीय आमों की मांग बढ़ी है, वह यह साबित करता है कि वैश्विक बाजार में भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार मजबूत हो रही है.