कपास आयात पर शुल्क हटने से घरेलू बाजार में दबाव, कीमतों में नरमी.. 1.68 फीसदी बढ़ा रेट

कपास आयात पर शुल्क हटाने के बाद घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है. CCI ने बिक्री मूल्य में कटौती की है, जबकि कुछ मिलों ने आयात सौदे शुरू कर दिए हैं. उद्योग का मानना है कि शुल्क मुक्त आयात से स्पिनिंग और टेक्सटाइल क्षेत्र को बेहतर गुणवत्ता की कपास और निर्यात प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा.

Kisan India
नोएडा | Published: 2 Jun, 2026 | 11:49 AM

Cotton Business: घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है. केंद्र सरकार द्वारा 1 जून से 30 अक्टूबर तक कपास आयात पर शुल्क हटाने की घोषणा के बाद बाजार में नरमी देखी जा रही है. उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ कपड़ा मिलों ने विदेशों से कपास आयात के लिए सौदे भी करना शुरू कर दिया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को ICE पर कपास वायदा कीमत 1.68 प्रतिशत बढ़कर 77.44 सेंट प्रति पाउंड के आसपास पहुंच गई.

इस बीच, भारतीय कपास निगम (CCI) ने 2025-26 सीजन की कपास के बिक्री मूल्य में 700 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की कटौती की है. इसके बावजूद बाजार से सीमित प्रतिक्रिया मिली और करीब 700 गांठ कपास की ही मांग आई, जिसमें अधिकांश खरीदारी मिलों ने की. रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने कहा कि शुल्क मुक्त आयात की अनुमति मिलने के बाद खरीदारों के पास अब कई विकल्प हैं. वे आयात कर सकते हैं या फिर घरेलू व्यापारियों, CCI और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कपास खरीद सकते हैं, इसलिए घरेलू कीमतों पर दबाव  बना हुआ है.

शुल्क मुक्त कपास आयात

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कपास आयात पर शुल्क हटाने के सरकार के फैसले से देश के वस्त्र उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने 1 जून से 31 अक्टूबर तक कपास आयात  को शुल्क मुक्त कर दिया है, ताकि टेक्सटाइल उद्योग को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध हो सके. हाल के महीनों में वैश्विक बाजार में तेजी के कारण कपास की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई थी. इस साल फरवरी की शुरुआत से लेकर 11 मई तक ICE कपास वायदा कीमतों में करीब 47 प्रतिशत का उछाल आया और भाव 88 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गए थे. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कीमतों में नरमी आई है और फिलहाल यह करीब 77 सेंट प्रति पाउंड के आसपास कारोबार कर रही हैं.

वस्त्र उत्पादों का उत्पादन बढ़ने की संभावना

कॉटयार्न ट्रेडलिंक के आनंद पोपट के अनुसार, आयात शुल्क हटने का सबसे बड़ा फायदा स्पिनिंग उद्योग को होगा. अब सूत निर्माता दुनिया के किसी भी देश से कपास आयात कर सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सूत का निर्यात कर पाएंगे. इसके अलावा, बेहतर गुणवत्ता और कम अशुद्धियों वाली कपास उपलब्ध होने से उच्च गुणवत्ता के सूत, कपड़े और अन्य वस्त्र उत्पादों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है.

कपास का रकबा बढ़ सकता है

उद्योग संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) का मानना है कि आगामी खरीफ सीजन  में कपास का रकबा बढ़ सकता है. किसानों को कपास के अच्छे दाम मिलने से वे इसकी खेती का क्षेत्र बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं. CAI के अनुसार, इस साल कपास का रकबा करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में देश में लगभग 114.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हुई थी. वहीं, 2026-27 विपणन सत्र के लिए केंद्र सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है. मध्यम रेशा (मीडियम स्टेपल) कपास का MSP 557 रुपये बढ़ाकर 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबा रेशा (लॉन्ग स्टेपल) कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. सरकार को उम्मीद है कि MSP में बढ़ोतरी से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और कपास उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.

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