Haryana News: हरियाणा के सिरसा जिले के भंभूर गांव के पास किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया की कथित कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है. रविवार को कृषि विभाग, पुलिस और जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त छापेमारी में 494 यूरिया के बैग जब्त किए गए. यह कार्रवाई भारतीय किसान एकता संगठन के सदस्यों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर की गई. शुरुआती जांच में पता चला है कि किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाली कृषि ग्रेड यूरिया को दोबारा पैक कर तकनीकी ग्रेड यूरिया के रूप में तैयार किया जा रहा था. आरोप है कि इसे राजस्थान के कोटा स्थित एक औद्योगिक इकाई को बेचने की तैयारी थी. मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है.
अधिकारियों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 8:30 बजे भंभूर गांव के पास एक भैंसों के बाड़े में छापेमारी की गई. टीम के पहुंचने से पहले बाड़े का मालिक और अन्य संदिग्ध मौके से फरार हो गए, जबकि वहां काम कर रहे कुछ मजदूर मिले. जांच के दौरान अधिकारियों ने एक कंटेनर ट्रक, भरे और खाली यूरिया के बैग, सीलिंग सामग्री तथा कई दस्तावेज जब्त किए, जिन्हें आगे की जांच के लिए कब्जे में लिया गया है.
क्या बोले किसान नेता
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय किसान एकता के प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि संगठन को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि किसानों के लिए सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया को दूसरे राज्यों की फैक्ट्रियों में अवैध रूप से बेचा जा रहा है. सूचना मिलने पर किसान नेताओं ने मौके का दौरा किया और पाया कि 45 किलो वाले सब्सिडी वाले यूरिया बैगों को खाली कर 50 किलो के सफेद बैगों में भरा जा रहा था, जिन पर ‘टेक्निकल ग्रेड’ लिखा हुआ था. इसके बाद इन्हें राजस्थान नंबर के एक कंटेनर में लोड किया जा रहा था.
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जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलने के बाद पुलिस, कृषि विभाग और जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची. छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में यूरिया, खाली बैग और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई. अधिकारियों ने पूरे स्टॉक को सील कर दिया और जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेज दिए हैं. जांच के दौरान ऐसी सील और उपकरण भी मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर बैगों पर ‘टेक्निकल ग्रेड’ की मुहर लगाने के लिए किया जाता था. अधिकारियों को शक है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है. मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके.
फर्जी बिल और ई-वे बिल का इस्तेमाल किया
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि जब्त की गई यूरिया मई 2026 के बैच की थी, जिसकी आपूर्ति कृभको (KRIBHCO) ने की थी. आरोप है कि इस यूरिया को दोबारा पैक कर राजस्थान के कोटा भेजने की तैयारी की जा रही थी. मौके से मिले दस्तावेजों में सिरसा के रानिया रोड स्थित कंदा कॉलोनी की ‘सतनाम ट्रेडर्स’ नामक फर्म का उल्लेख मिला. हालांकि, अधिकारियों ने जांच में पाया कि कृषि विभाग के रिकॉर्ड में इस नाम की कोई पंजीकृत फर्म मौजूद नहीं है. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि खेप को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी बिल और ई-वे बिल का इस्तेमाल किया गया था. अधिकारियों का मानना है कि पूरे मामले में जालसाजी और कालाबाजारी का संगठित नेटवर्क शामिल हो सकता है.
यूरिया आरोपियों तक कैसे पहुंची
अधिकारियों ने अब यह जांच शुरू कर दी है कि किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया आरोपियों तक कैसे पहुंची. जांच में यूरिया की पूरी सप्लाई चेन, डीलरों के रिकॉर्ड, बिक्री रजिस्टर और किसानों के खरीद दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी. वहीं, जीएसटी विभाग भी जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसमें कर चोरी भी की गई है. कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अमित कुमार ने कहा कि मौके से 494 यूरिया के बैग बरामद किए गए हैं. शुरुआती जांच में पता चला है कि कृषि उपयोग वाली यूरिया को तकनीकी ग्रेड बताकर कोटा भेजने की तैयारी थी. पूरे स्टॉक को सील कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है. उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की जाएगी.