Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर जिले में किसानों ने अहलुवाला गांव में तीन ट्रकों से 2,120 बैग कृषि यूरिया रोक लिए. किसानों का दावा था कि यह खाद अवैध है. दरअसल, ट्रक दोपहर करीब 3 बजे गोदाम पर यूरिया उतार रहे थे. तभी किसानो ने ये कार्रवाई की. वहीं, घटना के बाद हरियाणा कृषि और किसान कल्याण विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यमुनानगर के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एग्रीकल्चर, डॉ. आदित्य प्रताप डाबास ने कहा कि अहलुवाला का गोदाम एक लाइसेंसी उर्वरक विक्रेता का था और यूरिया बैग कानूनी थे. थोक विक्रेता और रिटेलर दोनों के पास इस खेप के बिल मौजूद थे. हालांकि, जांच में ई-वे बिल जारी करने के समय में असंगतियां पाई गईं. डॉ. डाबास ने कहा कि तीन ट्रकों के लिए थोक विक्रेता ने तीन ई-वे बिल जारी किए थे, लेकिन ट्रकों की जांच के समय यह समय मेल नहीं खा रहा था, यानी ई-वे बिल ट्रक रोकने के बाद जारी किए गए थे.
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दोनों पक्षों को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं
डॉ. डाबास ने कहा कि दोनों पक्षों को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं. उन्होंने कहा कि थोक विक्रेता को ई-वे बिल के समय में असंगति के बारे में जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. रिटेलर को निर्देश दिया गया है कि मामले की जांच पूरी होने तक वह इस यूरिया को किसी को भी न बेचे. सूत्रों के मुताबिक, सब्सिडी वाला कृषि यूरिया कभी-कभी कुछ प्लाईवुड फैक्ट्रियों में उद्योगिक उपयोग के लिए गायवर्ट किया जाता है, खासकर गोंद बनाने में, क्योंकि यह तकनीकी-ग्रेड यूरिया की तुलना में सस्ता होता है.
40 हजार बैग TGU की बिक्री दर्ज की गई है
बता दें कि यमुनानगर जिले में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्लाईवुड और उससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों पर विशेष नजर रखी जा रही है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने विशेष निगरानी में रखा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला कृषि-ग्रेड यूरिया उद्योगों में गलत तरीके से इस्तेमाल न हो. सख्त निगरानी के चलते जिले की प्लाईवुड इकाइयों में अब औद्योगिक उपयोग के लिए निर्धारित टेक्निकल ग्रेड यूरिया (TGU) का इस्तेमाल बढ़ा है. अक्टूबर 2025 से अब तक यमुनानगर की औद्योगिक इकाइयों को लगभग 40 हजार बैग TGU की बिक्री दर्ज की गई है.
कृषि-ग्रेड यूरिया की खपत में भी कमी देखी गई है
वर्ष 2025 में जिले में सब्सिडी वाले कृषि-ग्रेड यूरिया की खपत में भी कमी देखी गई है. इसका कारण प्लाईवुड फैक्ट्रियों में यूरिया के दुरुपयोग पर की गई सख्त कार्रवाई और किसानों में फसलों में यूरिया की मात्रा कम करने को लेकर बढ़ी जागरूकता बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में दिसंबर 2025 तक जिले को करीब 1 लाख 75 हजार बैग कम सब्सिडी वाला कृषि-ग्रेड यूरिया मिला.