त्योहारी सीजन से पहले चीनी सप्लाई बढ़ाने की तैयारी, 15 दिन पहले पेराई का प्रस्ताव.. उद्योग ने मांगी बड़ी राहत
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ISMA और NFCSF ने सरकार से अक्टूबर में 10-15 दिन पहले पेराई शुरू करने की अनुमति मांगी है. उद्योग ने अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए इंसेंटिव, अतिरिक्त बिक्री कोटा या CGST में छूट की मांग की है. संगठनों का दावा है कि देश में फिलहाल पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है.
Sugar Price Hike: देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी उद्योग ने सरकार को बड़ा प्रस्ताव दिया है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने सरकार से कहा है कि चीनी मिलों को इस बार अक्टूबर में 10 से 15 दिन पहले पेराई शुरू करने की अनुमति दी जाए. इससे बाजार में चीनी की सप्लाई समय पर बढ़ सकेगी. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब देश में चीनी की उपलब्धता कम रहने की आशंका है और जरूरत पड़ने पर आयात की संभावना भी बनी हुई है. हालांकि, दोनों उद्योग संगठनों ने साफ कहा है कि यदि मिलें राष्ट्रीय हित में समय से पहले पेराई शुरू करती हैं, तो सरकार को उनके अतिरिक्त खर्च और संभावित वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देना चाहिए.
दोनों संगठनों ने केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा को भेजे संयुक्त पत्र में कहा है कि समय से पहले पेराई शुरू करने का फैसला देश में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लिया जा रहा है. इसलिए सरकार को भी इस अतिरिक्त वित्तीय और परिचालन बोझ को कम करने के लिए मिलों की मदद करनी चाहिए. चीनी उद्योग ने सरकार से कहा है कि अगर मिलें तय समय से 10-15 दिन पहले पेराई शुरू करती हैं, तो इससे चीनी रिकवरी कम होने और संचालन लागत बढ़ने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसलिए इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार उचित इंसेंटिव दे.
10-15 दिन पहले पेराई शुरू करने का प्रस्ताव
उद्योग ने सुझाव दिया है कि सरकार अक्टूबर में बनने वाली चीनी के बराबर अतिरिक्त घरेलू बिक्री कोटा दे या फिर घरेलू चीनी बिक्री पर CGST में छूट जैसी राहत प्रदान करे. उद्योग संगठनों ने अपने पत्र में 17 जुलाई को सरकार के साथ हुई बैठक का भी जिक्र किया है. इसमें बताया गया कि 2026-27 चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) की पेराई सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था. उनका कहना है कि अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस कदम से नई चीनी त्योहारों से पहले ही बाजार में पहुंच जाएगी. इससे देशभर में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी, उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और त्योहारों के दौरान सप्लाई में कोई परेशानी नहीं होगी.
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निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने कहा है कि देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है. इसलिए चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि पेराई सीजन पहले शुरू करने का प्रस्ताव सरकार के साथ मिलकर त्योहारों के दौरान निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है.
जुलाई में कीमत बढ़कर 40.50 रुपये किलो हो गई
दोनों संगठनों ने हाल में चीनी की कीमतों में आई तेजी पर भी अपनी बात रखी. उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी मांग और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाती. 2025-26 चीनी सीजन में जून तक मिल स्तर (एक्स-मिल) पर चीनी की औसत कीमत 39.50 से 40 रुपये प्रति किलो रही, जो उत्पादन लागत से कम थी. जुलाई तक कीमत बढ़कर 40 से 40.50 रुपये प्रति किलो पहुंची, लेकिन यह भी करीब 42 रुपये प्रति किलो की औसत उत्पादन लागत से नीचे है. इसलिए उद्योग का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर भी चीनी मिलों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है.