गन्ना किसानों को नहीं हो रहा भुगतान ? 32 फीसदी तक बढ़ा बकाया.. सबसे ज्यादा इस राज्य में उधारी

उत्तर प्रदेश में गन्ने का बकाया पिछले तीन सालों में बहुत बढ़ा है. 2023-24 में यह 24 करोड़ रुपये था, 2024-25 में बढ़कर 321 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,287 करोड़ रुपये हो गया, यानी दस गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में किसानों को आर्थिक तंंगी का सामना करना पड़ा रहा है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 10:28 AM

Sugarcane Farmers: देश में गन्ना किसानों को समय पर बकाया भुगतान नहीं किया जा है. उन्हें अपनी फसल की कीमत पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है. इससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. खास बात यह है कि विलंब बकाया भुगतान कम होने के बजाए समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस साल गन्न के बकाया भुगतान में लगभग 32 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादित राज्य शामिल हैं. वहीं, इस मामले में डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने चिंता जताई है. जबकि, किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने और उनका बकाया भुगतान दिलाने की मांग की है, क्योंकि अगला फसल सीजन अब शुरू होने वाला है.

दरअसल, मामले का खुलासा संसद के चालू बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में पेश किए गए केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुदान संबंधी रिपोर्ट से हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया कि 16 फरवरी 2026 तक देशभर में किसानों को बकाया  गन्ने का भुगतान 16,087 करोड़ रुपये है. हालांकि, पिछले साल 2024-25 में यह राशि 497 करोड़ रुपये और 2023-24 में केवल 34 करोड़ रुपये थी. जबकि, वर्ष 2025-26 में किसानों को कुल 79,818 करोड़ रुपये भुगतान होना था, जिसमें से 63,731 करोड़ रुपये पहले ही चुका दिए गए हैं और बाकी का 16,087 करोड़ रुपये (लगभग 20 फीसदी) अब भी बकाया है.

कर्नाटक में दो वित्तीय वर्षों में बकाया शून्य था

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में गन्ने का बकाया पिछले तीन सालों में बहुत बढ़ा है. 2023-24 में यह 24 करोड़ रुपये था, 2024-25 में बढ़कर 321 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,287 करोड़ रुपये हो गया. यानी दस गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह महाराष्ट्र में बकाया क्रमश: 2023-24 में 2 करोड़ रुपये, 2024-25 में 123 करोड़ रुपये और 2025-26 में 4,252 करोड़ रुपये रहा. कर्नाटक में सबसे ज्यादा बकाया है. पिछले दो वित्तीय वर्षों में बकाया शून्य था, लेकिन 16 फरवरी 2026 तक यह 4,956 करोड़ रुपये हो गया.

तीन साल में कितनी बढ़ी बकाया राशि

राज्य / वर्ष 2023-24 (₹ करोड़) 2024-25 (₹ करोड़) 2025-26 (₹ करोड़) बढ़ोतरी का प्रतिशत (लगभग)
उत्तर प्रदेश 24 321 3,287 10x+
महाराष्ट्र 2 123 4,252 2,000x+
कर्नाटक 0 0 4,956 4,956x+

इसी तरह गुजरात में बकाया 5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,402 करोड़ रुपये हो गया. जबकि, तमिलनाडु में किसानों को 203 रुपये करोड़, बिहार में 212 करोड़ रुपये, हरियाणा में 373 करोड़ रुपये और पंजाब में 535 करोड़ रुपये बकाया है. मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना में किसानों को क्रमशः 366 करोड़ रुपये, 235 करोड़ रुपये और 152 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है.

किन राज्यों में कितना है बकाया

  • गुजरात: बकाया बढ़कर 1,402 करोड़ रुपये
  • तमिलनाडु: 203 करोड़ रुपये
  • बिहार: 212 करोड़ रुपये
  • हरियाणा: 373 करोड़ रुपये
  • पंजाब: 535 करोड़ रुपये
  • मध्य प्रदेश: 366 करोड़ रुपये
  • उत्तराखंड: 235 करोड़ रुपये
  • तेलंगाना: 152 करोड़ रुपये

किसान संगठनों ने जताई चिंता

वहीं, किसान संगठनों ने बकाया भुगतान में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं. महाराष्ट्र के ऑल इंडिया किसान सभा के वरिष्ठ नेता अजीत नवाले ने द हिन्दू से कहा है कि किसानों को कहा गया कि चीनी के दाम कम हैं और निर्यात घटने के कारण मिलें किसानों को उचित मूल्य नहीं दे पा रही हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलें सरकार की मदद मांग रही हैं और इसी वजह से किसानों को बकाया भुगतान अटका हुआ है. किसान लगातार सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.

 

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Published: 29 Mar, 2026 | 10:21 AM
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