धान के बाद अब गेहूं घोटाला! CCTV फुटेज से खुलेगा राज.. अधिकारियों ने तेज की मामले की जांच

रिपोर्ट में सामने आया है कि सरकारी e-Kharid पोर्टल का सुनियोजित तरीके से गलत इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से लाया गया गेहूं करनाल के स्थानीय किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से दर्ज किया गया. जांच में यह भी पाया गया कि आढ़तियों ने MFMB पोर्टल पर तय अधिकतम उत्पादन सीमा और असली फसल उत्पादन  के बीच के अंतर का गलत फायदा उठाया.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 11 May, 2026 | 09:03 AM

Wheat Procurement Scam: हरियाणा के करनाल में धान के बाद गेहूं घोटाला हुआ है. अब इस मामले में करनाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. आरोप है कि उत्तर प्रदेश के गेहूं को करनाल की मंडियों में स्थानीय किसानों के नाम पर बेचा गया. जांच के लिए पुलिस ने करनाल, कुंजपुरा, इंद्री और बियाना सब-यार्ड की मंडियों से रिकॉर्ड और CCTV फुटेज मांगे हैं, ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके. हालांकि, पुलिस ने सात आढ़तियों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें से दो एफआईआर छह आढ़तियों पर उत्तर प्रदेश का गेहूं करनाल के किसानों के नाम पर खरीदने के आरोप में दर्ज की गई हैं. वहीं एक एफआईआर एक आढ़ती के खिलाफ दर्ज की गई है, जिस पर सरकारी सप्लाई के लिए भेजे जाने वाले गेहूं के बैग में ईंटें मिलाने का आरोप है.

पुलिस यह जांच कर रही है कि सख्त खरीद नियमों के बावजूद इस तरह की गड़बड़ियां कैसे हुईं. इस सीजन में लागू नियमों के तहत किसानों का रजिस्ट्रेशन ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB)’ पोर्टल पर अनिवार्य है. इसके अलावा, गेट पास के लिए किसान की ट्रैक्टर-ट्रॉली  के साथ फोटो, आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और मंडियों व गोदामों की जियो-फेंसिंग जैसे सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि गेहूं की ढुलाई की रियल-टाइम निगरानी की जा सके.

CCTV फुटेज को भी बारीकी से जांचा जाएगा

एसपी नरेंद्र बिजारनिया ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है. करनाल की मंडियों में उत्तर प्रदेश के गेहूं को स्थानीय किसानों के नाम पर खरीदने में जिन लोगों की भूमिका है, उनकी जांच की जाएगी. इसके लिए पूरा रिकॉर्ड और CCTV फुटेज  को भी बारीकी से जांचा जाएगा. उत्तर प्रदेश से गेहूं आने और उसे स्थानीय स्तर पर खरीदने की शिकायतों के बाद उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने हरियाणा- उत्तर प्रदेश सीमा पर दो नाके लगाए हैं, जहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस लगातार निगरानी कर रहे हैं. इसके साथ ही अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) राहुल रैया के नेतृत्व में एक जांच टीम भी बनाई गई है. इस जांच के बाद 13 आढ़तियों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं. इनमें करनाल मंडी के 4, इंद्री के 6 और बियाना सब-यार्ड के 3 आढ़ती शामिल हैं. घरौंडा मंडी में पटवारियों द्वारा जांच के बाद कई ट्रैक्टर-ट्रॉली वापस भी भेज दी गई हैं.

इस तरह दिया फर्जीवाड़े को अंजाम

ADC की विस्तृत रिपोर्ट में सामने आया है कि सरकारी e-Kharid पोर्टल का सुनियोजित तरीके से गलत इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों से लाया गया गेहूं करनाल के स्थानीय किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से दर्ज किया गया. जांच में यह भी पाया गया कि आढ़तियों ने MFMB पोर्टल पर तय अधिकतम उत्पादन सीमा और असली फसल उत्पादन  के बीच के अंतर का गलत फायदा उठाया. करनाल की एक मंडी में CCTV जांच के दौरान यूपी नंबर वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गई, जिसमें यूपी में लीज पर ली गई जमीन का गेहूं लाया जा रहा था, लेकिन उसे एक स्थानीय किसान के नाम पर बेचा गया. अधिकारियों के मुताबिक यह मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साजिश और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसा गंभीर अपराध है.

पैसे का लेन-देन कर मंडी नियमों का उल्लंघन किया

इंद्री में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जहां आढ़तियों पर आरोप है कि उन्होंने ट्रांसपोर्ट ड्राइवरों के साथ पैसे का लेन-देन कर मंडी नियमों का उल्लंघन किया और गेहूं की लोडिंग में प्राथमिकता ली. बियाना सब-यार्ड में भी उत्तर प्रदेश से आया गेहूं स्थानीय किसानों के नाम पर e-Kharid पोर्टल में अवैध रूप से दर्ज किया गया. डीसी डॉ. शर्मा ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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Published: 11 May, 2026 | 08:58 AM
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