मध्य प्रदेश में पहले से तय तारीखों पर गेहूं खरीद शुरू नहीं होने पर राज्य सरकार ने मंडी केंद्रों के संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए खरीद संबंधी नए निर्देश जारी किए हैं. गेहूं खरीद की तारीख भी फाइनल की गई है और इसके अलावा जूट बोरों की कमी को दूर करने के साथ ही खाद्यान्न भंडारण की व्यवस्था को लेकर अपडेट जारी किया गया है. बता दें कि मध्य प्रदेश में 17 मार्च से गेहूं खरीद शुरू होने का ऐलान किया गया था, लेकिन 2 अप्रैल तक भी खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर किसानों में आक्रोश भड़क गया है, जिसके बाद सियासत भी गरमा गई.
मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के लिये इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है. मंत्री ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जा रही हैं.
10 अप्रैल से शुरू होगी खरीद और गेहूं किसानों को मिलेगा बोनस
मंत्री ने कहा कि किसानों को उपार्जन केन्द्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है. इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से गेहूं खरीद शुरू होगी. जबकि, बाकी संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद शुरू की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो विगत वर्ष से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है.
गेहूं खरीद टारगेट बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन किया
मंत्री कहा कि राजस्व विभाग की ओर से किसानों के पंजीकृत रकबे के सत्यापन का कार्य तेज गति से किया जा रहा है. सत्यापन पूरा होने के बाद किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया शुरू होगी. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी. इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है.

10 और 15 अप्रैल से गेहूं खरीद होगी.
केंद्र ने राज्य को भेजा 50 हजार जूट की गठान का स्टॉक
मंत्री ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण मंडियों में बारदाना की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया गया है. भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट बोरा की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है. साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग दे रही है. प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए जरूरी बारदानों की व्यवस्था खरीद प्रारंभ होने से पहले पूरी कर ली जाएगी.
खाद्यान्न भंडारण के लिए एक साथ कई महीनों का राशन बांटा जाएगा
मंत्री ने बताया कि जिन जिलों में खाद्यान्न भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 फीसदी तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है. साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल और मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी. वहीं, मध्यप्रदेश में देश की सर्वाधिक लगभग 400 लाख मीट्रिक टन की कवर्ड भंडारण क्षमता उपलब्ध है. इसमें से लगभग 103 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता खाली है, जो इस वर्ष निर्धारित गेहूं उपार्जन के लक्ष्य से अधिक है.