बीज उपचार का सही तरीका अपनाएं, 25 फीसदी तक घटेगा खाद खर्च.. होगी बंपर पैदावार
खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई और बीज उपचार बेहद जरूरी माना जा रहा है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को 10 जुलाई तक बुवाई पूरी करने और जैविक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है. इससे फसल मजबूत होगी, लागत घटेगी और उत्पादन बेहतर मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
मॉनसून की अच्छी बारिश के साथ खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुका है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसान 10 जुलाई तक सोयाबीन, मक्का, उड़द और मूंग जैसी फसलों की बुवाई पूरी कर लें. समय पर बुवाई करने से फसल का विकास बेहतर होता है और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं, बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे फसल को शुरुआती बीमारियों और कीटों से सुरक्षा मिलती है.
समय पर बुवाई और बीज उपचार है जरूरी
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खरीफ फसलों की अच्छी शुरुआत के लिए सही समय पर बुवाई करना सबसे महत्वपूर्ण है. बुवाई से पहले बीज उपचार करने से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधे मजबूत बनते हैं. इससे फसल पर फफूंद और अन्य रोगों का खतरा भी काफी कम हो जाता है. यदि किसान रासायनिक बीज उपचार करना चाहते हैं, तो कार्बेन्डाजिम और मैंकोजेब मिश्रित दवा का 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपयोग कर सकते हैं.
जैविक बीज उपचार से मिलेगा बेहतर लाभ
विशेषज्ञ बताते हैं कि रासायनिक उपचार के साथ-साथ जैविक बीज उपचार भी किसानों के लिए लाभदायक विकल्प है. इसके लिए ट्राइकोडर्मा का उपयोग किया जा सकता है. सोयाबीन, मक्का, उड़द और मूंग जैसी फसलों के बीजों का 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने पर बीज सड़ने की समस्या कम होती है. साथ ही जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधों का विकास तेजी से होता है.
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ऐसे बचाएं 25 फीसदी तक खाद का खर्च
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सोयाबीन जैसी दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का उपयोग काफी फायदेमंद होता है. यह मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे रासायनिक खाद की जरूरत लगभग 25 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इसके लिए 10 ग्राम राइजोबियम कल्चर प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करना चाहिए. इसके अलावा फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु (PSB) का उपयोग भी जरूरी है. यह मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस को पौधों के लिए उपलब्ध कराता है, जिससे खाद का बेहतर उपयोग होता है.
मिट्टी की सेहत सुधारने का आसान तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि खेत की मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाने के लिए प्रति एकड़ 2 किलो ट्राइकोडर्मा और 2 किलो PSB को अच्छी तरह गोबर की सड़ी हुई खाद में मिलाकर जुताई से पहले खेत में डालना चाहिए. इससे मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता भी कम पड़ती है. यदि किसान समय पर बुवाई के साथ बीज उपचार और जैविक तकनीकों को अपनाते हैं, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.