Tips For Farmers: अमरूद की खेती में लंबे समय से विल्ट रोग (Guava Wilt) किसानों के लिए बड़ी समस्या रहा है. यह रोग मुख्य रूप से फफूंद (fungus) संक्रमण के कारण होता है, जो पौधों की वृद्धि और उपज को प्रभावित करता है. 2014–2016 के बीच भारत के अमरूद नर्सरी क्षेत्रों में रूट-नॉट नीमाटोड (Root-Knot Nematode) का संक्रमण सामने आया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई. नीमाटोड नर्सरी की रोपण सामग्री के माध्यम से फैलता है और संक्रमित बागानों की पैदावार घट जाती है.
संक्रमण का फैलाव और असर
नीमाटोड से प्रभावित अमरूद के बागानों में नए पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और पुराने बागानों की उपज घट जाती है. कई अमरूद उगाने वाले क्षेत्रों में इसका व्यापक प्रभाव देखा गया है. जागरूकता बढ़ाने और उपचार के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अभी भी बहुत बड़े क्षेत्र संक्रमित हैं.
ICAR-CISH का प्रयास
आईसीएआर-केंद्रीय अमरूद एवं सीताफल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ ने MIDH (सहायक बागवानी विकास मिशन) के तहत ‘अमरूद रोग नियंत्रण योजना’ शुरू की है. इस योजना का मकसद लखनऊ और बदायूं जिलों के प्रभावित अमरूद बागानों और नर्सरी को नीमाटोड मुक्त करना है.
डॉ. टी. दामोदरन, निदेशक, ICAR-CISH ने बताया कि संक्रमित बागानों की लंबे समय तक निगरानी और इलाज किया जा रहा है. सभी किसानों तक मदद तुरंत नहीं पहुंच सकती, इसलिए अमरूद के बागान मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे डॉ. पी.के. शुक्ला, प्रधान वैज्ञानिक से संपर्क करें: 9451290652.
एकीकृत रोग प्रबंधन योजना
ICAR-CISH की इस योजना में निम्न उपाय शामिल हैं:
- मिट्टी का उपचार (Soil Drench Treatment): नीमाटोड प्रभावित नर्सरी और बागानों में निमाटिसाइड, फ्लुओपाइराम (Fluopyram) का प्रयोग.
- जैविक उपचार: मिट्टी में ट्राइकोडर्मा (Trichoderma spp.) या बैसिलस (Bacillus spp.) डालना. कभी-कभी नीम केक या कम्पोस्ट के साथ भी उपयोग किया जाता है.
- संवेदनशील पौधों से बचाव: ऐसे पौधे जो रोग फैलाने में संवेदनशील हों, उन्हें अमरूद के बागानों में न लगाएं.
- सहयोग और निगरानी: इलाज की सामग्री ICAR द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी और किसानों द्वारा प्रशिक्षित पेशेवरों की निगरानी में इसका इस्तेमाल किया जाएगा.
किसानों के लिए संदेश
अमरूद के बागान मालिकों से अनुरोध है कि संक्रमित पौधों की पहचान और तुरंत उपचार करें. ICAR-CISH की योजना किसानों को नि:शुल्क सामग्री और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती है. नियमित निगरानी, जैविक उपाय और सही प्रबंधन अपनाने से नीमाटोड और विल्ट रोग से प्रभावित बागानों की उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है.
अमरूद की खेती में नीमाटोड और विल्ट रोग गंभीर चुनौती हैं, लेकिन ICAR-CISH और MIDH परियोजना के प्रयास किसानों को सुरक्षित, स्वस्थ और उच्च उत्पादकता वाले बागानों की ओर मार्गदर्शन कर सकते हैं.