छत्तीसगढ़ में रासायनिक खाद के इस्तेमाल से खराब हुई कृषि भूमि को ढैंचा हरी खाद की मदद से उपजाऊ बनाने में मदद मिली है. बलौदाबाजार जिला कृषि विभाग ने बताया है कि यहां के 140 किसानों की करीब 250 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि केमिकल फर्टिलाइजर की वजह से खराब हो गई थी, जिसे फिर से उपजाऊ बनाने में सफलता मिली है. इसके लिए विभाग की ओर से किसानों को ढैंचा के बीज 50 फीसदी छूट पर दिए गए. अब स्थानीय किसानों में खरीफ सीजन की फसलों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद बढ़ी है.
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना का किसानों को मिला लाभ
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) योजना के तहत बलौदाबाजार जिले में किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर ढैंचा और मूंग का बीज उपलब्ध कराया गया. इसका सकारात्मक असर अब खेती में दिखाई देने लगा है. भाटापारा विकासखंड के करीब 140 किसान 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ढैंचा को हरी खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हुई है और धान की पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
45 दिन में तैयार हुई ढैंचा खाद ने दिखाया कमाल
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि क्षेत्र के 140 किसान 250 एकड़ से अधिक खेतों में ढैंचा की खेती कर रहे हैं. ढैंचा तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जो करीब 40 से 45 दिनों में हरी खाद के रूप में उपयोग के लिए तैयार हो जाती है. किसान धान की रोपाई से पहले खेत में ढैंचा उगाकर उसे मिट्टी में मिला देते हैं. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. ढैंचा की जड़ों में रहने वाले सूक्ष्मजीव वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में मदद करते हैं, जिससे रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता कम हो सकती है.
किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने में मिली सफलता
कृषि विभाग के अनुसार हरी खाद के रूप में ढैंचा का इस्तेमाल विशेष रूप से ऐसी जमीन के लिए उपयोगी है, जिसकी उर्वरता लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से प्रभावित हुई है. ढैंचा मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने के साथ उसकी जलधारण क्षमता और संरचना में सुधार करने में मदद करता है. किसानों का कहना है कि हरी खाद के उपयोग से रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम हुआ है. इससे खेती की लागत घटने के साथ शुद्ध मुनाफा बढ़ाने में भी मदद मिल रही है.
किसान बोले- खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो गई थी
कृषि विभाग के अनुसार ढाबाडीह निवासी किसान दिनेश साहू और हेमलाल साहू ने कहा कि लंबे समय तक रासायनिक खाद के उपयोग के कारण खेत की उर्वरता प्रभावित होने लगी थी, जिसका असर उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा. इसी दौरान कृषि विभाग से हरी खाद के बारे में जानकारी मिली. कृषि विभाग से 50 फीसदी छूट पर ढैंचा का बीज मिलने के बाद उन्होंने खेतों में इसका प्रयोग शुरू किया. किसानों के मुताबिक ढैंचा को हरी खाद के रूप में इस्तेमाल करने के बाद खेत की स्थिति में सुधार हुआ और धान की पैदावार भी बढ़ी. साथ ही रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम हुआ है.

ढाबाडीह निवासी किसान दिनेश साहू और हेमलाल साहू.
खरीफ सीजन की फसलों की अच्छी पैदावार की संभावना
किसानों का कहना है कि हरी खाद का प्रयोग खेती को कम लागत वाला बनाने की दिशा में कारगर कदम साबित हो रहा है. खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार होने की संभावना बढ़ गई है. किसानों ने कहा कि रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से उत्पादन लागत में कमी आती है और खेत की मिट्टी की सेहत भी बेहतर बनी रहती है. कृषि विभाग अब किसानों को हरी खाद के उपयोग और इसके फायदे के प्रति लगातार जागरूक कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान ढैंचा जैसी फसलों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ खेती की लागत कम कर सकें.