खीरे में झुलसा रोग का बढ़ा खतरा, समय रहते नहीं संभले तो सूख सकती है पूरी फसल

गर्मी और बढ़ती नमी के बीच खीरे की फसल में झुलसा रोग तेजी से फैल रहा है. इस बीमारी से पौधे सूखने लगते हैं और उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते बीमारी पहचानकर सही दवा और सावधानी अपनाने की सलाह दी है ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

नोएडा | Updated On: 8 May, 2026 | 03:35 PM

Cucumber Farming: गर्मी बढ़ने के साथ खेतों में खीरे की फसल पर बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. कई इलाकों में किसानों की फसल झुलसा रोग की चपेट में आने लगी है. शुरुआत में पत्तियों पर छोटे धब्बे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरा पौधा कमजोर होकर सूखने लगता है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और समय पर इलाज नहीं होने पर पूरी फसल खराब हो सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर किसान शुरुआत में ही इसके लक्षण पहचान लें और सही दवा का इस्तेमाल करें, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

गर्मी और नमी बढ़ते ही तेजी से फैल रही बीमारी

इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई जगहों पर गर्मी के साथ नमी भी ज्यादा बनी हुई है. ऐसे मौसम में खीरे की फसल में झुलसा रोग तेजी  से फैलने लगता है. यह एक फफूंदजनित बीमारी है, जो धीरे-धीरे पूरे खेत को अपनी चपेट में ले सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि यह बीमारी सबसे पहले पत्तियों पर असर डालती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पौधे का तना भी संक्रमित होने लगता है. धीरे-धीरे पौधा सफेद पड़ने लगता है और उसकी बढ़वार रुक जाती है. कई किसानों को शुरुआत में यह सामान्य समस्या लगती है, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरी फसल खराब होने लगती है.

पत्तियों पर दिखते हैं ऐसे खतरनाक संकेत

इस बीमारी के लक्षण  आसानी से पहचाने जा सकते हैं. सबसे पहले पत्तियों के नीचे छोटे-छोटे कीट दिखाई देते हैं, जो पत्तियों का रस चूसते हैं. इसके बाद पत्तियों पर पीले, भूरे या गोल धब्बे बनने लगते हैं. कई बार पत्तों में छोटे छेद भी दिखाई देने लगते हैं. अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो पौधे के तने से गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ निकलने लगता है. यह संकेत बेहद खतरनाक माना जाता है. इसके बाद पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है और फल लगना भी कम हो जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अगर रोजाना फसल की निगरानी करें, तो बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ सकते हैं. इससे इलाज आसान हो जाता है और नुकसान कम होता है.

सही दवा और समय पर छिड़काव है सबसे बड़ा बचाव

झुलसा रोग से बचाव के लिए समय पर सही दवा का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को खेत में बीमारी दिखते ही तुरंत दवा का छिड़काव शुरू कर देना चाहिए. रस चूसने वाले कीटों को रोकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा काफी असरदार मानी जाती है. वहीं फफूंद को खत्म करने के लिए कार्बेन्डाजिम और मैनकोजेब का मिश्रण उपयोगी रहता है. इन दवाओं का सही मात्रा में पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करने से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई किसान बीमारी बढ़ने के बाद दवा डालते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. इसलिए शुरुआत में ही सावधानी जरूरी है.

तुड़ाई और दवा के बीच रखें सही अंतर

दवा का छिड़काव करते समय किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, दवा डालने के तुरंत बाद खीरे की तुड़ाई नहीं करनी चाहिए. छिड़काव के कम से कम 4 से 5 दिन बाद ही फलों को तोड़ना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा जब एक बार तुड़ाई पूरी हो जाए, तब दोबारा दवा का छिड़काव करना चाहिए. इससे पौधों को आराम मिलता है और नई फलत अच्छी रहती है. सही समय पर दवा और तुड़ाई का संतुलन बनाए रखने से फसल की गुणवत्ता भी अच्छी बनी रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि गर्मियों में किसानों को अपनी फसल पर लगातार नजर रखनी चाहिए. थोड़ी सी लापरवाही भी पूरी मेहनत खराब कर सकती है. अगर समय रहते बीमारी की पहचान कर सही उपाय अपनाए जाएं, तो खीरे की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है.

Published: 8 May, 2026 | 03:35 PM

Topics: