गर्मियों में खीरा भरेगा पैसों की झोली.. सिर्फ 50 दिनों में तैयार होगी फसल, जानें फरवरी में कैसे करें बुवाई

फरवरी के मध्य में खीरे की अगेती किस्मों की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा कमाई का अच्छा मौका बन सकती है. नर्सरी पद्धति, सही मिट्टी और संतुलित सिंचाई अपनाकर किसान कम समय में फसल तैयार कर बाजार में बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं. इससे खेती लाभदायक व्यवसाय बन सकती है.

नोएडा | Updated On: 15 Feb, 2026 | 11:55 AM

Cucumber Farming: सर्दी ढलते ही अगर किसान सही समय पकड़ लें, तो वही खेत कुछ ही हफ्तों में कैश मशीन बन सकता है. गर्मी में सबसे ज्यादा बिकने वाली सब्जियों में शामिल खीरा अगर समय से पहले बाजार में पहुंच जाए, तो दाम भी ऊंचे मिलते हैं और मुनाफा भी बढ़ जाता है. खेती से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी के मध्य में की गई अगेती खेती किसानों के लिए बड़ा फायदा दे सकती है. सही तरीका अपनाया जाए तो करीब 50 दिनों में फसल तैयार हो जाती है.

क्यों फायदेमंद है फरवरी की अगेती खेती

खेती विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के मध्य में तापमान आमतौर पर 18 से 30 डिग्री के बीच रहता है, जो खीरे के बीजों  के अंकुरण के लिए बेहतर माना जाता है. इस समय बोई गई फसल जल्दी तैयार हो जाती है और जब बाजार में खीरे की कमी रहती है, तब अच्छे दाम मिलते हैं. अगर ठंड ज्यादा हो तो सीधे खेत में बीज डालने से अंकुरण कम हो सकता है. इसलिए अगेती खेती में नर्सरी पद्धति अपनाना ज्यादा सुरक्षित तरीका माना जाता है. पहले छोटे ट्रे या कप में पौधे तैयार किए जाते हैं, फिर 15–20 दिन बाद मजबूत पौधों को खेत में लगाया जाता है. इससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और नुकसान की संभावना कम रहती है.

सही मिट्टी और तैयारी से बढ़ेगी पैदावार

खीरे की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी  सबसे अच्छी मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पानी रुकता नहीं है और जड़ों को हवा मिलती रहती है. खेत की 2-3 बार अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. प्रति हेक्टेयर 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है. पौधों के बीच 45-60 सेंटीमीटर और कतारों के बीच करीब डेढ़ मीटर की दूरी रखना जरूरी है, ताकि बेलें आसानी से फैल सकें. खेती जानकारों का कहना है कि खेत में हल्के ऊंचे बेड या मेढ़ बनाकर रोपाई करने से पानी का सही निकास होता है और सिंचाई करना भी आसान रहता है. एक हेक्टेयर के लिए करीब 2-2.5 किलो बीज पर्याप्त होता है.

सिंचाई और खाद में न करें लापरवाही

खीरे की फसल में पानी  का संतुलन बहुत जरूरी है. रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें. इसके बाद मिट्टी की नमी देखकर हल्की-हल्की सिंचाई करें. ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं. ड्रिप सिंचाई तरीका अपनाया जाए तो पानी की बचत भी होती है और पौधों को सही मात्रा में नमी मिलती है. प्रति एकड़ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने से फलन अच्छा होता है. रोपाई के करीब 45-50 दिन बाद फल आना शुरू हो जाता है. अगर समय पर तुड़ाई की जाए तो लगातार कई हफ्तों तक उत्पादन मिलता रहता है.

कम लागत में ज्यादा मुनाफे का मौका

अगेती खेती  का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फसल बाजार में तब पहुंचती है जब सप्लाई कम और मांग ज्यादा होती है. ऐसे समय में किसानों को सामान्य से बेहतर भाव मिल सकता है. अगर पूरी योजना बनाकर खेती की जाए, तो कम लागत में भी अच्छा उत्पादन संभव है. समय, मिट्टी, सिंचाई और खाद का सही ध्यान रखा जाए तो खीरे की अगेती खेती किसानों के लिए सच में “ATM मशीन” साबित हो सकती है. यानी सही तकनीक और सही समय पकड़ लिया जाए, तो सिर्फ 50 दिनों में खेत से नकदी फसल लेकर अच्छी कमाई की जा सकती है.

Published: 15 Feb, 2026 | 11:54 AM

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