धान की सही तरीके से खेती बनाएगी करोड़पति, किस्म और नई तकनीक से प्रति एकड़ 50 क्विंटल तक उपज मिलेगी

High Yield Paddy Variety: अगर किसान धान की नई उन्नत या हाइब्रिड किस्मों के साथ SRI या DSR जैसी आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो प्रति एकड़ 35 से 50 क्विंटल तक उपज ले सकते हैं. सही बीज, संतुलित खाद, समय पर रोपाई और कीट-रोग नियंत्रण से खेती की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 30 Jun, 2026 | 11:59 AM

Paddy Cultivation: धान देश की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है. हर साल लाखों किसान इसकी खेती करते हैं, लेकिन आज भी कई किसान पुरानी किस्मों और पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं, जिससे उत्पादन सीमित रह जाता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर किसान उन्नत बीज और आधुनिक खेती की तकनीक अपनाएं, तो कम खर्च में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है.

उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार

पारंपरिक धान की किस्मों से आमतौर पर 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज मिलती है. वहीं नई हाई यील्डिंग और हाइब्रिड किस्में 30 से 40 क्विंटल या इससे भी अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं.

किसान इन उन्नत धान किस्मों का चयन कर सकते हैं:

  • IR-64
  • MTU-1010
  • MTU-1001
  • स्वर्णा
  • नवीन
  • पूसा DST Rice-1

फायदा: ये किस्में कई बीमारियों के प्रति ज्यादा सहनशील हैं और कम समय में तैयार हो जाती हैं.

अगर किसान हाइब्रिड धान लगाना चाहते हैं, तो

  • Arize 6444 Gold
  • PHB-71
  • KRH-2
  • DRRH-2

जैसी किस्में बेहतर विकल्प मानी जाती हैं. इनसे सामान्य किस्मों की तुलना में 20 से 35 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन मिल सकता है.

खेत की तैयारी और रोपाई का सही तरीका

अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बेहद जरूरी है. सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए. इसके बाद खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े. बीजों की पहले नर्सरी तैयार करें. लगभग 20 से 25 दिन की पौध रोपाई के लिए उपयुक्त रहती है. रोपाई करते समय पौधों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें, ताकि पौधों का विकास अच्छी तरह हो सके.

SRI और DSR तकनीक से होगा फायदा

धान की खेती में SRI (सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन) तकनीक काफी सफल मानी जा रही है. इस विधि में 8 से 15 दिन की छोटी पौध लगाई जाती है और एक स्थान पर केवल एक पौधा लगाया जाता है. पौधों के बीच लगभग 25×25 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है. इस तकनीक में लगातार खेत में पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती. केवल मिट्टी को नम रखा जाता है, जिससे जड़ें मजबूत बनती हैं और उत्पादन बढ़ता है. इसके अलावा DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक भी पानी की बचत करने में मदद करती है.

खाद और सिंचाई का रखें पूरा ध्यान

धान की अच्छी फसल के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग जरूरी है. खेत में समय-समय पर खरपतवार निकालते रहें और सिंचाई का सही प्रबंधन करें. जरूरत से ज्यादा पानी भरने से कई रोग लग सकते हैं.

कीट और रोग से ऐसे बचाएं फसल

अगर अच्छी पैदावार चाहिए, तो हमेशा प्रमाणित बीज ही इस्तेमाल करें और बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें. फसल में समय-समय पर नजर रखें, ताकि अगर कोई बीमारी या कीट दिखाई दे तो तुरंत कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर दवा का छिड़काव किया जा सके. धान की रोपाई समय पर करना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि देर से रोपाई करने पर पैदावार कम हो सकती है. वहीं, जब करीब 80 से 85 फीसदी दाने पक जाएं, तभी फसल की कटाई करें. कटाई के बाद धान को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें.

कम खर्च में ज्यादा मुनाफा

अगर किसान धान की सही किस्म चुनें, समय पर खेती करें और फसल को जरूरत के हिसाब से खाद-पानी दें, तो प्रति एकड़ 35 से 50 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है. अगर किसी किसान को यह समझ नहीं आ रहा कि उसके इलाके के लिए कौन-सी किस्म सबसे अच्छी रहेगी, तो वह अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से सलाह ले सकता है. वहां से सही जानकारी लेकर किसान बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं.

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